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भारत में दस्तक देने की कवायद में टेस्ला! अधिकारियों की PMO के साथ हो सकती है बैठक

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Last Updated- May 16, 2023 | 10:15 PM IST

टेस्ला में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अधिकारी और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी अगले दो दिन भारत में बिताने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक टेस्ला के अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय समेत सरकार के विभिन्न शीर्ष अ​धिकारियों के साथ बैठकें करेंगे। मगर इन बैठकों के बारे में पूछे जाने पर भारत में टेस्ला के निदेशक प्रशांत आर मेनन ने कोई जवाब नहीं दिया।

सूत्रों का कहना है कि कंपनी के अधिकारी देखने आ रहे हैं कि टेस्ला कार के लिए भारत की कंपनियों से ही कलपुर्जे लेना कैसे बढ़ाया जा सकता है। सोना समूह पहले ही टेस्ला को डिफरेंशियल गियर दे रहा है। संधार टेक्नोलॉजिज परोक्ष रूप से कुछ पुर्जे देती है मगर आपूर्तिकर्ताओं की संख्या सीमित है।

कई लोग मान रहे हैं कि यह भारत में कार बेचने के लिए सरकार के साथ संवाद फिर शुरू करने की टेस्ला की कोशिश है। टेस्ला पूरी तरह तैयार (सीबीयू) कार का आयात कर भारत में उन्हें बेचने की योजना 2022 में टाल चुकी है। सरकार ने लक्जरी कारों पर आयात शुल्क कम करने का टेस्ला का अनुरोध नहीं माना था, जिसके बाद कंपनी ने यह फैसला किया था। 40,000 डॉलर से अधिक कीमत वाली लक्जरी कारों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगता है। ऐसे में टेस्ला 3 कार की कीमत 1 करोड़ रुपये के पार चली जाएगी, जिसके खरीदार बहुत मुश्किल से मिलेंगे। इसीलिए टेस्ला ने शुल्क घटाकर 40 फीसदी करने का अनुरोध किया था। मगर सरकार ने शुल्क कम करने के बजाय टेस्ला को दूसरी वैश्विक कंपनियों की तरह भारत में ही कारें असेंबल करने के लिए कहा। उसने कहा कि कंपनी को चीन से कार आयात नहीं करनी चाहिए।

टेस्ला पहले भी भारत से कल-पुर्जों की आपूर्ति बढ़ाने की संभावना तलाश रही थी। उसने अमेरिका में तकनीकी शो में भारतीय कलपुर्जा विनिर्माताओं को आमंत्रित करने के लिए एक्मा से बात भी की थी। मगर टेस्ला ने भारत आने की योजना टाली तो यह बातचीत भी रद्द हो गई।

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भारत आने की टेस्ला की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ी। हालांकि ईलॉन मस्क ने दो साल पहले भारत आने का ऐलान किया था। इसके बाद कार आयात के लिए बेंगलूरु में एक फर्म का पंजीकरण भी कराया गया और कंपनी के रिटेल शोरूम खोलने पर चर्चा हुई। मगर जल्द ही मस्क को लग गया कि इजाजत आसानी से नहीं मिलेगी। तब उन्होंने शोरूम खोलने की योजना रद्द कर दी और भारत में बनाई गई टीम के लोगों को दूसरे देशों में भेज दिया।

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मस्क ने ट्विटर पर कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर भारत में आयात शुल्क (60 से 100 फीसदी) दुनिया के बड़े देशों में सबसे अधिक है और कंपनी ने भारत आने के लिए इस शुल्क में भारी कटौती की शर्त रखी थी। उन्होंने यह भी शिकायत की है कि स्वच्छ ऊर्जा वाहनों को पेट्रोल वाहनों के बराबर माना जाता है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों से मेल नहीं खात। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि उसे चीन से कार आयात करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और उन्हें भारत में ही असेंबल करना होगा। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसे देसी कंपनियों ने भी वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम के माध्यम से कहा कि सरकार ने भारतीय उद्योग के लिए स्थानीय कलपुर्जों की बहुत ऊंची सीमा रखी है। इसलिए शुल्क में कटौती अनुचित होगी।

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First Published - May 16, 2023 | 10:15 PM IST

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