वाहन कलपुर्जा और टायर विनिर्माताओं ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसकी वजह यह है कि कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण उनके परिचालन मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि अगर महंगाई का दबाव बना रहता है, तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
इस क्षेत्र की कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के दौरान प्राकृतिक रबर, इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, माल ढुलाई और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को मुख्य चुनौतियों के तौर पर चिह्नित किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वाहन विनिर्माताओं के मामले में लागत का बोझ आगे डालने वाली व्यवस्था आम तौर पर देरी से काम करती है।
सिएट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी अर्नब बनर्जी ने कहा कि कंपनी मार्च और अप्रैल के बीच पहले ही लगभग 5 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि लागू कर चुकी है तथा मई और जून के दौरान 5 प्रतिशत की और वृद्धि कर सकती है। बनर्जी के अनुसार कच्चे माल की लागत में लगभग 13 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और लाभ सुरक्षित रखने के लिए आगे और व्यस्थित मूल्य निर्धारण कार्यों की आवश्यकता है।
इसी तरह अपोलो टायर्स ने कहा कि उसने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के लिए कीमतों में 6 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा पहले ही कर दी है। मुख्य वित्तीय अधिकारी गौरव कुमार ने संकेत दिया कि अब तक की गई बढ़ोतरी से शायद लागत में हुई बढ़ोतरी की पूरी भरपाई न हो पाए और आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।