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Vedanta demerger: रिलायंस, ONGC, टाटा और JSW के सामने 5 नई कंपनियां, कौन मारेगा बाजी?

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5 हिस्सों में बंटी वेदांता, हर बिज़नेस अब अलग पहचान के साथ मैदान में, देश की दिग्गज कंपनियों से होगा मुकाबला

Last Updated- May 04, 2026 | 9:48 AM IST
Vedanta Demerger

Vedanta Demerger: वेदांता लिमिटेड का डिमर्जर 1 मई 2026 से लागू हो गया है, जिसके तहत कंपनी को पांच अलग-अलग इकाइयों में बांट दिया गया है। रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के पास वेदांता का एक शेयर था, उन्हें चार नई कंपनियों वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड (VAML), वेदांता पावर (पहले TSPL), वेदांता ऑयल एंड गैस (पहले MEL) और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (VISL) के एक-एक शेयर मिलेंगे। इसके अलावा बाल्को में वेदांता की हिस्सेदारी भी VAML को ट्रांसफर की जाएगी।

Vedanta Demerger: पारदर्शिता और वैल्यू बढ़ाने की उम्मीद

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान के मुताबिक इस कदम से कंपनी में पारदर्शिता बढ़ेगी, पूंजी का बेहतर उपयोग होगा और हर बिज़नेस की अलग-अलग वैल्यू सामने आएगी। इससे निवेशकों को सही मूल्यांकन का फायदा मिल सकता है।

हिंदुस्तान जिंक सबसे मजबूत बिज़नेस (HZL)

हिंदुस्तान जिंक वेदांता समूह का सबसे अहम और मजबूत बिज़नेस माना जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक बनाने वाली कंपनी है और FY26 तक भारत के जिंक बाजार में इसकी करीब 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके साथ ही यह दुनिया के टॉप 10 सिल्वर उत्पादकों में भी शामिल है।

कंपनी राजस्थान में 6 खदानें चलाती है, जिनमें रामपुरा अगुचा खास तौर पर सबसे बड़ी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड जिंक खदान मानी जाती है, जहां से हर साल करीब 5.08 मिलियन टन अयस्क का उत्पादन होता है। कंपनी की कुल जिंक स्मेल्टिंग क्षमता 934 KTPA है, जबकि लेड की क्षमता 210 KTPA और सिल्वर रिफाइनिंग क्षमता 800 टन प्रति साल है।

आने वाले समय में कंपनी अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है। लक्ष्य है कि स्मेल्टिंग क्षमता को बढ़ाकर 2 मिलियन टन प्रति साल तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही कंपनी का एबिटडा FY27 में 2.7 अरब डॉलर से बढ़कर FY30 तक 3.4 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अगर मौजूदा बाजार भाव बने रहते हैं, तो यह आंकड़ा 4.2 अरब डॉलर तक भी जा सकता है।

हिंदुस्तान जिंक का देश में कोई सीधा मुकाबला नहीं है, यानी इस तरह का बड़ा और पूरी तरह इंटीग्रेटेड जिंक बिज़नेस भारत में और कोई कंपनी नहीं करती। यही वजह है कि यह अपने सेगमेंट में लगभग अकेले ही दबदबा बनाए हुए है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो H1 FY26 में हिंदुस्तान जिंक ने 4,883 करोड़ रुपये का मुनाफा और 15,873 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की। दिलचस्प बात यह है कि अकेले इस कंपनी का मुनाफा, पूरी वेदांता लिमिटेड के मुनाफे से भी ज्यादा रहा। उसी अवधि में वेदांता का कुल मुनाफा 3,064 करोड़ रुपये और कुल कमाई 76,652 करोड़ रुपये रही।

वेदांता एल्युमिनियम वैश्विक स्तर पर मजबूत (VAML)

वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड में कंपनी का पूरा एल्युमिनियम वाला बिज़नेस आ गया है। इसमें झारसुगुड़ा प्लांट, LNJ रिफाइनरी और बाल्को शामिल हैं। बाल्को में वेदांता की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है और आगे इसे और बढ़ाने की योजना है। इन सबके दम पर यह कंपनी चीन को छोड़ दें तो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी एल्युमिनियम बनाने वाली कंपनी बन जाती है।

डिमर्जर के बाद बाल्को की हिस्सेदारी भी इसी कंपनी में ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिससे एल्युमिनियम बिज़नेस और मजबूत होगा।

लेकिन यहां मुकाबला आसान नहीं है। इस सेक्टर में हिंडाल्को और नाल्को जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। हिंडाल्को, आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी है और काफी बड़ा नाम है, जबकि नाल्को सरकारी कंपनी है।

अगर आंकड़ों की बात करें तो H1 FY26 में हिंडाल्को ने 8,745 करोड़ रुपये का मुनाफा और 1,30,290 करोड़ रुपये की कमाई की। नाल्को ने 2,479.42 करोड़ रुपये का मुनाफा और 8,099.28 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया। वहीं वेदांता के एल्युमिनियम बिज़नेस की कमाई 30,227 करोड़ रुपये रही।

यह पढ़ें: Vedanta Q4 Results: वेदांत ने तोड़े रिकॉर्ड, मुनाफा 92% उछला; निवेशकों को 1100% डिविडेंड का तोहफा

वेदांता ऑयल एंड गैस निजी क्षेत्र में बड़ा प्लेयर (MEL / Cairn)

वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड में कैर्न ऑयल एंड गैस का बिज़नेस शामिल है, जो भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कच्चे तेल उत्पादक कंपनी है।

इस बिज़नेस को लेकर एक्सपर्ट्स भी साफ कहते हैं कि मुकाबला आसान नहीं है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रांति बाथिनी के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज को कुछ हद तक प्रतियोगी माना जा सकता है, लेकिन उसका कारोबार सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। वहीं अगर सीधी तुलना की जाए, तो ONGC और ऑयल इंडिया ही वेदांता ऑयल एंड गैस के असली मुकाबले में आते हैं, क्योंकि इनका काम लगभग एक जैसा है।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। H1 FY26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा 42,783 करोड़ रुपये और कमाई 5,58,964 करोड़ रुपये रही। ONGC ने इसी दौरान 24,168.81 करोड़ रुपये का मुनाफा और 3,21,019.2 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया। वहीं ऑयल इंडिया का मुनाफा 3,690.32 करोड़ रुपये और कमाई 16,322.77 करोड़ रुपये रही। इसके मुकाबले वेदांता के ऑयल एंड गैस सेगमेंट की कमाई 4,633 करोड़ रुपये रही।

वेदांता पावर थर्मल पावर में मजबूत मौजूदगी (TSPL)

वेदांता का पावर बिज़नेस भी अब अलग कंपनी के रूप में सामने आ रहा है। इसमें TSPL, JSG IPP, एथेना पावर और मीनाक्षी पावर जैसे प्लांट शामिल हैं। कुल मिलाकर 4,000 मेगावाट से ज्यादा की क्षमता के साथ यह कंपनी देश की पांचवीं सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी बनती है। डिमर्जर के बाद TSPL का नाम बदलकर वेदांता पावर किया जाएगा, हालांकि इसके लिए रेगुलेटरी मंजूरी जरूरी होगी।

लेकिन इस सेक्टर में मुकाबला काफी कड़ा है। टाटा पावर, अदाणी पावर, NHPC और JSW एनर्जी जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से ही मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

अगर आंकड़ों को देखें तो H1 FY26 में टाटा पावर ने 2,507.71 करोड़ रुपये का मुनाफा और 33,579.98 करोड़ रुपये की कमाई की। अदाणी पावर का मुनाफा 6,759.49 करोड़ रुपये और कमाई 26,674.53 करोड़ रुपये रही। वहीं NHPC और JSW एनर्जी ने क्रमशः 2,350.44 करोड़ रुपये और 1,660.13 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जबकि उनकी कमाई 6,579.03 करोड़ रुपये और 10,320.79 करोड़ रुपये रही।

इसके मुकाबले वेदांता के पावर बिज़नेस की कमाई 4,268 करोड़ रुपये रही। यानी कंपनी इस सेक्टर में मौजूद तो है, लेकिन अभी बड़े खिलाड़ियों से पीछे है और आगे बढ़ने के लिए इसे काफी मेहनत करनी होगी।

वेदांता आयरन एंड स्टील निर्यात पर फोकस (VISL)

वेदांता की नई कंपनी VISL में आयरन ओर और स्टील का पूरा बिज़नेस शामिल किया गया है। इसमें सेसा आयरन ओर, ESL स्टील और लाइबेरिया का WCL प्रोजेक्ट आते हैं। विस्तार के बाद ESL स्टील की क्षमता 3.5 MTPA तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इन सबके साथ यह कंपनी भारत के बड़े निजी आयरन ओर निर्यातकों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो H1 FY26 में वेदांता के आयरन ओर बिज़नेस की कमाई 2,783 करोड़ रुपये रही। वहीं NMDC की कमाई 13,116.97 करोड़ रुपये और गोदावरी पावर एंड इस्पात की कमाई 2,630.93 करोड़ रुपये रही। मुनाफे की बात करें तो NMDC ने 3,650.11 करोड़ रुपये और गोदावरी पावर ने 378.06 करोड़ रुपये कमाए।

स्टील सेक्टर में मुकाबला और भी बड़ा है। यहां JSW स्टील और टाटा स्टील जैसे दिग्गज खिलाड़ी हैं। H1 FY26 में JSW स्टील की कमाई 88,299 करोड़ रुपये और टाटा स्टील की कमाई 1,11,867.41 करोड़ रुपये रही।

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First Published - May 4, 2026 | 9:25 AM IST

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