जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लेनदारों की समिति ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) को बताया कि वेदांत ने इस प्रक्रिया के दौरान अपनी मूल्यांकन स्थिति तक पहुंच हासिल करने के बाद शायद अपनी बोली में संशोधन किया हो। एनसीएलएटी के समक्ष लेनदारों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ऐसा प्रतीत होता है कि वेदांत लिमिटेड को संवेदनशील स्कोरिंग विवरण तक पहुंच मिल गई थी, जिससे उसे अपने प्रस्ताव में बदलाव करने का अवसर मिल गया।
कर्ज देने वालों के अनुसार वेदांत शुरू में मूल्यांकन के मुख्य पैमानों पर खरी नहीं उतरी थी, लेकिन अपनी सापेक्ष स्थिति का पता चलने के बाद उसने अपने प्रस्ताव में सुधार किया, विशेष रूप से नेट प्रेजेंट वैल्यू’ और ‘इक्विटी योगदान’ के मामले में। लेनदारों की समिति (सीओसी) का मानना है कि इस तरह का घटनाक्रम यह संकेत देता है कि जानकारी लीक हुई है, जिससे इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। सीओसी दिवालियापन की प्रक्रिया में सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था होती है। इस मामले पर मंगलवार को फिर से विचार किया जाएगा।
धातु एवं खनन कंपनी वेदांत ने सोमवार को बताया कि उसने लंबे समय से प्रतीक्षित डीमर्जर के लिए 1 मई, 2026 को प्रभावी तारीख और रिकॉर्ड तारीख, दोनों के तौर पर तय किया है। यह समूह का अपने अलग-अलग व्यवसायों को सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित करने की योजना का महत्त्वपूर्ण कदम है। कंपनी ने एक्सचेंज को भेजी जानकारी में कहा है कि उसके बोर्ड ने अपनी मौजूदा पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत इस समय-सीमा को मंजूरी दे दी है।