भारत की तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार परिचालक कंपनी वोडाफोन आइडिया (वी) ने गुरुवार को कहा कि उपभोक्ता हितों को प्रमुखता देते हुए सबको समान रूप से इंटरनेट का अनुभव मिलना चाहिए। कंपनी ने भारती एयरटेल की 5जी स्लाइसिंग पर आधारित प्राथमिकता वाले पोस्टपेड योजनाओं की ओर इशारा करते हुए कुछ सवाल उठाए जिनमें 5जी तकनीक के जरिये कुछ ग्राहकों को प्राथमिकता वाली नेटवर्क सेवा दी जा रही है।
आदित्य बिड़ला समूह के निवेश वाली यह कंपनी नेट न्यूट्रैलिटी (सबको बराबरी से इंटरनेट अधिकार) नियमों के उल्लंघन के विवाद में शामिल हो गई, लेकिन उसने सीधे-सीधे एयरटेल का नाम नहीं लिया। अभी तो यह अकेली दूरसंचार कंपनी है जिसने आधिकारिक रूप से टिप्पणी की है कि क्या इस तरह के प्राथमिकता वाले मॉडल से पोस्टपेड और प्रीपेड ग्राहकों के इंटरनेट से जुड़े अनुभव में अंतर हो सकता है।
वोडाफोन आइडिया के मुख्य विपणन अधिकारी अवनीश खोसला ने कहा, ‘भारत की डिजिटल वृद्धि का आधार सभी के लिए किफायती और सुलभ कनेक्टिविटी की उपलब्धता रही है। वी का मानना है कि हर ग्राहक को समान और निरंतर नेटवर्क का अनुभव मिलना चाहिए। किसी उपयोगकर्ता के प्रोफाइल के आधार पर विशेष स्पीड या सेवाएं देने से डिजिटल तंत्र की समानता पर सवाल उठते हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत को डिजिटल वृद्धि जारी रखने के लिए, तकनीक में प्रगति के साथ-साथ, नवाचार और पैसा बनाने के मॉडल में सभी ग्राहकों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पारदर्शिता और सब तक इसकी उपलब्धता अहम हैं।’ यह बयान उस वक्त आया जब भाजपा सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति, एयरटेल की प्राथमिक पोस्टपेड योजनाओं के संबंध में चिंताओं की जांच कर रही है।
समिति ने इसके लिए दूरसंचार विभाग और दूरसंचार नियामक संस्था, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारियों से बैठक की। समिति यह देख रही है कि क्या यह सेवा नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन कर रही है और क्या प्रीपेड उपयोगकर्ताओं की सेवा गुणवत्ता प्रभावित हो रही है या डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रीमियम के लिए भेदभावपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।