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Waaree Energies को तगड़ा झटका, विदेशी राजस्व 20% गिरा और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

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पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती लागत के चलते वारी एनर्जीज का विदेशी राजस्व घटा और मुनाफे पर भी असर पड़ा।

Last Updated- May 04, 2026 | 8:59 AM IST
Waaree Energies
Representative image

वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के दौरान वारी एनर्जीज (Waaree Energies) का विदेशी बाजारों से मिलने वाला राजस्व करीब 20 प्रतिशत घट गया। इस राजस्व में अमेरिका में स्थानीय विनिर्माण और निर्यात भी शामिल है। पश्चिम एशिया संकट के कारण लॉजिस्टिक संबंधी दिक्कतों ने इस गिरावट में भूमिका निभाई। आम तौर पर विदेशी बाजार प्रीमियम यानी महंगा होता है। इस बाजार ने तीसरी तिमाही के दौरान कंपनी के कुल राजस्व में 32.6 प्रतिशत का योगदान दिया था। यहां तक कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में इसका हिस्सा 45 प्रतिशत से भी अधिक रहा।

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) अभिषेक पारेख ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को विशेष बातचीत में बताया कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण भारत से कंपनी के ग्राहकों को जाने वाली खेपों में देरी हुई और मार्च 2026 के अंत तक स्टॉक का स्तर भी बढ़ गया। उन्होंने कहा, ‘इसके परिणामस्वरूप हमें गैर-प्रीमियम यानी कम महंगे बाजारों में ज्यादा निर्यात करना पड़ा, जिससे राजस्व का मिश्रण बिगड़ गया।’

पिछले सप्ताह घोषित चौथी तिमाही के अपने वित्तीय नतीजों में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की इस कंपनी ने बताया कि मार्च में खत्म तिमाही में उसके मार्जिन में उम्मीद से ज्यादा गिरावट आई है। इस तिमाही के दौरान मार्जिन 18.6 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 23 प्रतिशत था।

कंपनी के मुनाफे पर कमोडिटी की ज्यादा कीमतों का भी असर पड़ा। पारेख ने कहा, ‘हमने चांदी की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर देखीं, जिसका हमारी लागत पर खासा असर पड़ता है। इसके साथ ही तांबे और एल्युमीनियम की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, जो अक्षय ऊर्जा के उपकरणों में अहम हिस्से होते हैं।’ वारी के मामले में सेल की लागत में चांदी की हिस्सेदारी लगभग 30 से 35 प्रतिशत होती है। उन्होंने बताया कि जनवरी में जब कीमतें बढ़कर शीर्ष स्तर पर पहुंची हुई थीं, तो यह हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक भी पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि मॉड्यूल स्तर पर लागत पर इसका असर 10 से 12 प्रतिशत तक पड़ता है। गैस की कमी के कारण कांच और अन्य सामग्रियों की कीमतों पर भी असर पड़ा, जिसकी वजह से उन्हें कुछ संयंत्र कुछ हद तक बंद करने पड़े।

कंपनी अगले दो सालों के दौरान लगभग 30,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च करने की योजना बना रही है। यह निवेश बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (20 गीगावॉट क्षमता के लिए 10,000 करोड़ रुपये), इंगट और वेफर विनिर्माण (6,500 करोड़ रुपये से ज्यादा), सेल विनिर्माण (5,000 करोड़ रुपये), ग्लास विनिर्माण (3,900 करोड़ रुपये) और बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और जमीन में (लगभग 3,200 करोड़ रुपये ) किया जाएगा।

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First Published - May 4, 2026 | 8:59 AM IST

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