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कमजोर O2C से झटका, फिर भी जियो ने बचाई लाज, रिलायंस के नतीजों में बड़ा ट्विस्ट

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कमजोर O2C और एक्सप्लोरेशन कारोबार के दबाव से रिलायंस के नतीजे कमजोर रहे, जबकि जियो की मजबूत ग्रोथ ने कुछ सहारा दिया।

Last Updated- April 27, 2026 | 7:34 AM IST
Reliance JIO
Representative image

अपने ऊर्जा कारोबार में कई तरह की मुश्किलों का सामना करने की वजह से देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजे ब्रोकरेज की उम्मीदों से कमजोर रहे। इसके ऑयल-टु-केमिकल्स (ओ2सी) और एक्सप्लोरेशन सेगमेंट में उत्पादन का वॉल्यूम और इसकी बिक्री से मिलने वाली रकम कई तिमाहियों के निचले स्तर पर पहुंच गई।

यह देखते हुए कि ये दोनों सेगमेंट परिचालन मुनाफे में करीब 40 फीसदी का योगदान करते हैं, इन दोनों में सालाना आधार पर 4 से 18 फीसदी की गिरावट के कारण कुल मिलाकर परिचालन के मोर्चे पर प्रदर्शन लगभग स्थिर रहा। ईरान युद्ध के कारण आई बाधाओं ने पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में दूरसंचार और खुदरा क्षेत्र के उपभोक्ता कारोबारों में हुई मजबूत वृद्धि के असर को खत्म कर दिया।

हालांकि, इसमें तेजी के अहम कारक इसके दूरसंचार उद्यम (जियो) की लिस्टिंग और नए ऊर्जा कारोबार, खासकर सोलर एनर्जी में हो रही प्रगति ही हैं, लेकिन चौथी तिमाही के निराशाजनक नतीजों और ओ2सी सेगमेंट पर दबाव को देखते हुए निकट भविष्य में इस शेयर पर दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अपनी कमाई के अनुमान और लक्षित कीमत में कटौती की है। फिर भी उन्होंने इस शेयर पर खरीद बरकरार रखी है।

इसकी वजह इसका मौजूदा मूल्यांकन और पिछले एक महीने में बेंचमार्क निफ्टी 50 के मुकाबले इस शेयर का प्रदर्शन (गिरावट/कमजोर प्रदर्शन) है।
ओ2सी सेक्टर के सामने आ रही समस्याओं का जिक्र करते हुए दौलत कैपिटल के योगेश पाटिल और स्नेहदीप अरोड़ा ने कहा है कि इस कारोबार को कच्चे तेल की बढ़ी हुई खरीद लागत, इंटीग्रेटेड नेफ्था क्रैकर मार्जिन में कमी, फीडस्टॉक की ऊंची कीमतों के बीच पॉलिमर डेल्टा में कमजोरी और ऑटो फ्यूल मार्केटिंग के मार्जिन में गिरावट (~5.2 रुपये प्रति लीटर) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे इसकी कमाई में अनुमानित तौर पर 1,100 करोड़ रुपये की कमी आई। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे मुश्किल हालात अभी बहुत ज्यादा बेहतर नहीं हुए हैं।

दौलत कैपिटल ने हायर क्रैक के फायदों, तेल और गैस सेगमेंट में तेल की ज्यादा कीमतों से होने वाले मुनाफे और टैरिफ बढ़ोतरी से जियो की एआरपीयू आधारित वृद्धि को देखते हुए अपने शुद्ध लाभ के अनुमानों को बढ़ा दिया है। उसने अपनी लक्षित कीमत 25 रुपये बढ़ाकर 1,695 रुपये कर दी है। साथ ही अपनी सिफारिश एकत्रित करें से बदलकर खरीदें कर दी है। परिचालन के मोर्चे पर लाभ में 16 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी (एकीकृत वृद्धि 4.2 फीसदी) और एकीकृत सेगमेंट मुनाफे में करीब 42 फीसदी का योगदान देने के साथ दूरसंचार कारोबार (जियो) आरआईएल की चौथी तिमाही के नतीजों का मुख्य आकर्षण रहा।

इस सेगमेंट के कुल राजस्व में सालाना आधार पर 12.6 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। इसकी मुख्य वजह ग्राहकों की संख्या में 7.4 फीसदी की वृद्धि और एआरपीयू में 3.8 फीसदी की बढ़त रही। मुनाफे में बढ़ोतरी की एक और वजह 5जी ग्राहकों का बढ़ता हिस्सा (54 फीसदी) भी था। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च ने जियो के राजस्व और परिचालन लाभ के अपने अनुमानों में 1-2 फीसदी की कटौती की है। इसकी वजह टैरिफ बढ़ोतरी में देरी और कुल ग्राहकों में मशीन-टु-मशीन (एम2एम) ग्राहकों (ऑटोनॉमस डिवाइस/सेंसर) का बढ़ता हिस्सा है। उन्हें उम्मीद है कि टैरिफ बढ़ोतरी का अगला दौर (बेस पैक पर 15 फीसदी या 50 रुपये प्रति माह) वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में आ सकता है मगर इसमें देरी भी संभव है।

हालांकि ब्रोकरेज ने ऊर्जा कारोबार में चुनौतियों और जियो में टैरिफ बढ़ाने में देरी के कारण वित्त वर्ष 27 के लिए अपनी कमाई का अनुमान घटा दिया है। लेकिन उसका मानना है कि जियो ही वृद्धि का सबसे बड़ा जरिया बनी रहेगी। उसे उम्मीद है कि आगे चलकर आरआईएल के बढ़ते परिचालन लाभ में डिजिटल कारोबार का योगदान 80 फ़ीसदी होगा।

आदित्य बंसल की अगुआई वाले विश्लेषकों के अनुसार, ये अतिरिक्त लाभ वायरलेस टैरिफ में बढ़ोतरी, वायरलेस क्षेत्र में बाजार हिस्सेदारी में बढ़त और घरों व एंटरप्राइज के लिए दी जाने वाली सेवाओं के लगातार विस्तार से मिलेंगे। ब्रोकरेज फर्म ने शेयर की खरीद रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन ऊर्जा कारोबार की कमजोरी को देखते हुए अपनी लक्षित कीमत 1,715 रुपये से घटाकर 1,655 रुपये कर दी है।

खुदरा कारोबार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। तुलनात्मक आधार पर राजस्व वृद्धि 14 फीसदी रही जबकि परिचालन के मोर्चे पर प्रदर्शन कम रहा। जहां राजस्व में बढ़ोतरी किराना, फैशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की वजह से हुई, वहीं क्विक कॉमर्स सेगमेंट में निवेश बढ़ाने से मुनाफे पर असर पड़ा।

मोतीलाल ओसवाल रिसर्च का अनुमान है कि स्टोर पिकअप में बढ़ोतरी और क्विक कॉमर्स में बढ़ती गति से राजस्व वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, क्विक कॉमर्स के नुकसानों के कारण अल्पावधि के मुनाफे पर बुरा असर पड़ने की संभावना है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि खुदरा कारोबार वित्त वर्ष 25-28 के दौरान 12 फीसदी राजस्व और परिचालन लाभ में बढ़त दर्ज करेगा। ब्रोकरेज ने शेयर को खरीद की रेटिंग दी है और लक्षित कीमत को बिना किसी बदलाव के 1,700 रुपये पर बरकरार रखा है।

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First Published - April 27, 2026 | 7:34 AM IST

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