तीन अरब डॉलर से अधिक वाले टीवीएस मोबिलिटी समूह की कंपनी और देश की प्रमुख एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला समाधान प्रदाता टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस (एससीएस) ने अपने वैश्विक कारोबार पर पश्चिम एशिया संकट का काफी कम असर देखा है। कंपनी के प्रबंध निदेशक रवि विश्वनाथन ने शाइन जेकब के साथ कंपनी की विविधता और आगे चलकर विकास की संभावना के बारे में बातचीत की। प्रमुख अंश …
वैश्विक नजरिये से देखें तो यह अनिश्चित समय है। अलबत्ता पश्चिम एशिया के हालात का हमारे कारोबार पर सीधा असर काफी सीमित रहा है। इस क्षेत्र में हमारी भागीदारी नगण्य है और हमारे मुख्य बाजार स्थिर हैं। इसलिए संरचनात्मक रूप से हम सुरक्षित हैं। हम वाणिज्यिक या भौगोलिक रूप से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं हैं। तथापि माल ढुलाई में साफ तौर पर रुकावट है। जहाजों के पश्चिम एशिया मार्गों से बचने के कारण अपने मुकामों तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है। अच्छी बात यह है कि मार्च में हमारा कारोबार बहुत स्थिर रहा है। ईंधन, बीमा और युद्ध की लागत ने माल ढुलाई की लागत बढ़ा दी है। शिपिंग कंपनियां अधिभार लगा रही हैं और हम इसे अपने ग्राहकों पर डालने में सक्षम रहे हैं।
चूंकि हमारे कई शिपिंग कंपनियों के साथ करार हैं। इसलिए हम अपने ग्राहकों को अच्छा मूल्य प्रदान करने में सक्षम रहे हैं। कंटेनर की कमी पर हम नजर रख रहे हैं। फिर भी चीजें नियंत्रण में हैं। मार्च के महीने में कोई संरचनात्मक चिंता नहीं है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि यह विलंब किस तरह असर डालता है।
हमें मार्जिन पर असर नहीं दिख रहा है। अगर युद्ध जारी रहता है, तो हमें यह देखना होगा कि क्या ग्राहक कोविड के समय की तरह उत्पादन कम करते हैं। मुझे ऐसा होता नहीं दिख रहा है। अल्पावधि में कोई भी ग्राहक वॉल्यूम में कोई गिरावट नहीं देख रहा है। भारत सहित दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला कारोबार में वॉल्यूम स्थिर है। सबसे अहम बात यह कि माल ढुलाई कारोबार में वॉल्यूम स्थिर है, जिसका अर्थ यह है कि खेपें योजना के अनुसार जारी हैं। हमें वॉल्यूम सामान्य दिख रह है। हम अपने मार्जिन पर किसी भी मूल्य निर्धारण का असर नहीं देख रहे हैं।
हम इस वित्त वर्ष में आसानी से 10,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर जाएंगे। अगर आप तीसरी तिमाही के हमारे आंकड़े देखें, तो भारत में खासी रफ्तार है। तिमाही आधार पर हमारी लगभग 4.5 से 5 प्रतिशत की वृद्धि है। हम वित्त वर्ष 27 के लिए दो अंकों में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, शायद 16 प्रतिशत के आसपास। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 29 तक राजस्व लगभग 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जिसमें से घरेलू कारोबार का हिस्सा लगभग 30 से 32 प्रतिशत हो सकता है। अभी घरेलू कारोबार लगभग 27 प्रतिशत है।