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Advent–Whirlpool स्टेक सेल बातचीत फेल, 1 अरब डॉलर की एडवेंट डील बीच में ही टूटी

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ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल ने इस सौदे के लिए बातचीत की थी, लेकिन वैल्यूएशन पर सहमति न बनने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया

Last Updated- December 06, 2025 | 5:00 PM IST
Whirlpool
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिकी घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनी Whirlpool की इंडियन यूनिट को खरीदने की बड़ी डील टूट गई है। ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल ने इस सौदे के लिए बातचीत की थी, लेकिन वैल्यूएशन पर सहमति न बनने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों के मुताबिक, एडवेंट 1 अरब डॉलर तक की डील में फ्रंटरनर था, लेकिन अब दोनों पक्षों ने इस पर चुप्पी साध ली है।

Whirlpool कॉर्प, जो मिशिगन में बेस्ड है, अपनी इंडियन सब्सिडियरी में 51 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। जनवरी में कंपनी ने कहा था कि वो इस स्टेक को घटाकर करीब 20 फीसदी तक लाना चाहती है, ताकि ग्लोबल एसेट्स की रीऑर्गनाइजेशन के तहत अपना कर्ज चुकाए। उस वक्त अनुमान था कि इससे 550 से 600 मिलियन डॉलर कैश मिल सकता है। एडवेंट अगर 31 फीसदी स्टेक खरीदता, तो इंडियन रेगुलेशंस के मुताबिक उसे अतिरिक्त 26 फीसदी के लिए ओपन ऑफर देना पड़ता, जिससे कुल हिस्सेदारी 57 फीसदी हो जाती। सूत्र बताते हैं कि ये पूरी डील 1 अरब डॉलर की पड़ती।

एडवेंट ने कमेंट करने से इनकार कर दिया, जबकि Whirlpool ने इसपर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया। मामले की गोपनीयता की वजह से सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी।

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इंडिया में चुनौतियां बनीं बाधा

डील टूटने की एक बड़ी वजह इंडिया में Whirlpool के सामने आ रही शॉर्ट-टर्म मुश्किलें रहीं। नेगोशिएशंस से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि एडवेंट ने कम दाम की मांग की, क्योंकि प्रोडक्ट स्टैंडर्ड्स और एनर्जी एफिशिएंसी के सख्त नियमों से कंपनी पर दबाव है। वहीं, Whirlpool पैरेंट का मकसद सिर्फ कैश जुटाना था, ताकि कर्ज कम हो सके, इसलिए वो ज्यादा वैल्यू चाहते थे। रॉयटर्स को ये पता नहीं चल सका कि Whirlpool कितने की मांग कर रहा था और एडवेंट ने क्या काउंटर ऑफर दिया।

Whirlpool इंडिया में दशकों से घर-घर जाना-पहचाना नाम है, इसका “Whirlpool, Whirlpool” जिंगल आज भी लोगों की जुबान पर है। मार्च तक के फाइनेंशियल ईयर में कंपनी की ऑपरेशनल रेवेन्यू 16 फीसदी बढ़कर 880.53 मिलियन डॉलर हो गई, लेकिन एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्लेयर्स से तगड़ा कॉम्पिटिशन मिल रहा है, जिससे सेल्स पर असर पड़ा। इसी साल कंपनी के शेयर्स 47 फीसदी गिर चुके हैं।

एडवेंट की Whirlpool में दिलचस्पी इंडियन मार्केट में उसकी स्ट्रैटेजिक एंट्री का हिस्सा थी। कंपनी पहले से ही कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में इन्वेस्टेड है, जैसे यूरेका फोर्ब्स में। ये डील अगर हो जाती, तो एडवेंट को इंडिया के बढ़ते बाजार में मजबूत पकड़ मिलती। लेकिन अब Whirlpool को अपना कर्ज कम करने के लिए नए रास्ते तलाशने पड़ेंगे।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - December 6, 2025 | 5:00 PM IST

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