फिनो पेमेंट्स बैंक ने अपने प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी ऋषि गुप्ता की पुनर्नियुक्ति के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगने वाले प्रस्ताव को वापस ले लिया है। बैंक ने इस कदम के पीछे उचित प्रक्रिया और सुदृढ़ कारोबार संचालन के तौर-तरीके को बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला दिया।
यह फैसला गुप्ता को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी के कथित आरोपों में गिरफ्तारी के करीब एक महीने बाद जमानत मिलने के अगले दिन आया है।
बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी ई जानकारी में स्पष्ट किया है कि बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ के तौर पर दोबारा नियुक्ति के लिए ऋषि गुप्ता की उम्मीदवारी पर कोई असर नहीं पड़ा है और इस कार्रवाई से उनकी उम्मीदवारी किसी भी तरह से वापस नहीं ली गई है और न ही छोड़ी नहीं गई है या कोई नुकसान पहुंचा है।
बैंक ने कहा कि इस प्रस्ताव पर उचित समय पर पुनर्विचार किया जाएगा और यह बैंक की नामांकन और पारिश्रमिक समिति तथा बोर्ड द्वारा गुप्ता की ‘उपयुक्त और सही’ स्थिति का पुनर्मूल्यांकन और साथ ही भारतीय रिजर्व (आरबीआई) की अंतिम राय पर निर्भर करेगा। 26 फरवरी को जारी किया गया यह प्रस्ताव उस डाक मतपत्र का हिस्सा था जिसमें शेयरधारकों से 2 मई, 2026 से 1 मई, 2029 तक तीन साल के कार्यकाल के लिए गुप्ता की पुनर्नियुक्ति के लिए मंजूरी मांगी गई थी।
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मतपत्र में दो प्रस्ताव शामिल थे- वित्त वर्ष 2025 के लिए गुप्ता को पारिश्रमिक का भुगतान और प्रबंध निदेशक व सीईओ के रूप में उनकी दोबारा नियुक्ति। दूसरे प्रस्ताव के वापस लिए जाने के बाद अब केवल पारिश्रमिक प्रस्ताव पर ही मतदान होगा। बैंक ने कहा कि पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर पहले से डाले गए मत अमान्य माने जाएंगे।
गुप्ता को रियल मनी गेमिंग पारिस्थितिकी तंत्र में प्रोग्राम मैनेजरों से जुड़ी कथित जीएसटी चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उनकी रिट याचिका खारिज कर दी थी मगर बाद में हैदराबाद की एक विशेष अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी।
विशेष अदालत के जमानत आदेश के अनुसार गुप्ता को 10 लाख रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के साथ दो गारंटर प्रस्तुत करने होंगे। अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने, विदेश यात्रा से पहले पूर्व अनुमति लेने और अगले आदेश तक हर महीने के पहले और तीसरे सोमवार को अधिकारियों के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया।
फिनो पेमेंट्स बैंक ने स्पष्ट किया कि जांच कुछ प्रोग्राम मैनेजरों से संबंधित है जो कई बैंकों से जुड़े हुए हैं और बैंक के स्वयं के जीएसटी अनुपालन से इसका कोई लेना-देना नहीं है। बैंक ने कहा कि वह अधिकारियों के साथ पूरी तरह सहयोग करना जारी रखेगा।