facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

IBC ने सुधारी बैंकिंग सेक्टर की सेहत, NPA वसूली में बड़ा रोल: सीतारमण

Advertisement

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आईबीसी (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश किया।

Last Updated- March 30, 2026 | 2:16 PM IST
Nirmala Sitharaman
अब तक आईबीसी में सात बार संशोधन किया जा चुका है। - File Image

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) देश के बैंकिंग क्षेत्र की सेहत सुधारने में एक प्रमुख और बेहद अहम फैक्टर रहा है। इसमें गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की वसूली भी शामिल है। लोकसभा में आईबीसी (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश करते हुए मंत्री ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी रिज्योल्यूशन प्रॉसेस से बाहर आने के बाद कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और उनकी कॉरपोरेट गवर्नेंस व्यवस्था में भी सुधार आया है।

वित्त मंत्री ने यह टिप्पणी आईबीसी (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा के दौरान दी, जो लोकसभा की प्रवर समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुत किया गया। इस विधेयक में आईबीसी में 12 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। यह कानून वर्ष 2016 में लागू हुआ था।

सीतारमण ने कहा कि आईबीसी ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में अहम रोल निभाया है और रिज्योल्यूशन प्रॉसेस के जरिए बैंकों ने आधे से अधिक एनपीए की वसूली की है।

सरकार ने 12 अगस्त, 2025 को इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था, जिसमें कई बदलाव प्रस्तावित किए गए थे। इनमें इन्सॉल्वेंसी रिज्योल्यूशन आवेदनों को स्वीकार करने में लगने वाले समय को कम करने के प्रावधान भी शामिल हैं। इस विधेयक को लोकसभा की प्रवर समिति के पास भेजा गया था, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। अब तक आईबीसी में सात बार संशोधन किया जा चुका है।

IBC क्यों बना गेमचेंजर?

2016 से पहले बैंकों के पास NPA वसूलने का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं था। केस सालों तक कोर्ट में चलते थे। कंपनियां डिफॉल्ट करके भी काम करती रहती थीं। बैंकों का पैसा फंसा रहता था

IBC आने के बाद तय समय सीमा में समाधान (180–330 दिन) सुनि​श्चित हुआ। कंपनी को बेचकर या पुनर्गठन से पैसा वापस हुआ। प्रमोटरों पर दबाव बढ़ा और एनपीए रिकवरी में सुधार देखने को मिला।

वित्त मंत्री के अनुसार, कुल NPA का आधा से ज्यादा हिस्सा IBC के जरिए रिकवर हुआ। बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट केस तेजी से सुलझे और बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत हुई। जैसेकि कई बड़े स्टील और इंफ्रा कंपनियों के केस IBC के तहत सुलझे और बैंकों को भारी रकम वापस मिली।

कॉरपोरेट गवर्नेंस पर असर

IBC का एक बड़ा अप्रत्यक्ष फायदा भी देखने को मिला है। कंपनियों में अनुशासन बढ़ा है। प्रमोटर अब डिफॉल्ट करने से डरते हैं। साथ ही निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। वित्त मंत्री ने भी कहा कि इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया से निकलने के बाद कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। IBC के बाद NPA रेशियो घटा है। बैंकों की उधार देने की क्षमता बढ़ी और निवेश और आर्थिक गतिविधि को समर्थन मिला है।

नए संशोधन क्यों जरूरी?

सरकार IBC को और प्रभावी बनाना चाहती है। प्रस्तावित बदलावों में मुख्य फोकस:

  • केस स्वीकार करने में लगने वाला समय कम करना
  • प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना
  • छोटे मामलों का जल्दी निपटारा

 

पीटीआई इनपुट के साथ

Advertisement
First Published - March 30, 2026 | 2:16 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement