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सरकारी बैंकों का ब्याज दर स्प्रेड 10 साल के नए निचले स्तर पर, NIM पर बढ़ा दबाव

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निजी क्षेत्र के बैंकों का स्प्रेड भी मार्च 2024 की तुलना में अप्रैल 2024 में 6 आधार अंक घटकर 3.75 प्रतिशत हो गया है। यह सरकारी बैंकों की तुलना में लगातार अधिक बना हुआ है।

Last Updated- June 06, 2024 | 9:55 PM IST
Bank Holiday

अप्रैल 2024 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) का ब्याज दर स्प्रेड 10 साल के नए निचले स्तर 2.25 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसके पहले का निचला स्तर मार्च 2024 में 2.28 प्रतिशत था। यह बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज पर लिए जाने वाले औसत ब्याज दर और घरेलू सावधि जमाओं पर दिए जाने वाले औसत ब्याज दर का अंतर होता है। रेटिंग एजेंसी केयर एज के विश्लेषण से यह जानकारी मिली है।

मई 2014 में सरकारी बैंकों का स्प्रेड करीब 3 प्रतिशत था। पिछले साल से सरकारी बैंकों का स्प्रेड कम हो रहा है। यह मई 2023 के 2.82 प्रतिशत से कम हो रहा है।

निजी क्षेत्र के बैंकों का स्प्रेड भी मार्च 2024 की तुलना में अप्रैल 2024 में 6 आधार अंक घटकर 3.75 प्रतिशत हो गया है। एजेंसी ने कहा है कि निजी क्षेत्र के बैंकों का स्प्रेड सरकारी बैंकों की तुलना में लगातार अधिक बना हुआ है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCB) का स्प्रेड मासिक आधार पर 5 आधार अंक कम हुआ है और यह अप्रैल 2024 में 2.90 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

SCB द्वारा दिए गए ऋण पर ब्याज दर क्रमिक आधार पर 2 आधार अंक कम हुई है और यह 9.81 प्रतिशत हो गई है। वहीं इसके विपरीत इनकी जमा दर अप्रैल 2024 में 3 आधार अंक बढ़कर 6.91 प्रतिशत हो गई है। बैंकों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ असुरक्षित उधारी की वृद्धि में कमी के कारण कारण स्प्रेड को लेकर दबाव बढ़ा है। दिए गए कर्ज पर ब्याज दर और जमा दर के बीच स्प्रेड जून 2023 के बाद महामारी के पहले के स्तर पर आ गया है, जिसकी वजह से NIM पर दबाव बढ़ा है।

बैंक से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि देनदारियों को लेकर लड़ाई इस साल भी बनी रहेगी। इस समय बैंक, धन की बढ़ती लागत को उधार लेने वालों पर डालने के मामले में बैंकों की इस समय सीमाएं हैं और इसकी वजह से बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है।

नई उधारी पर ब्याज दर और जमा दरों के बीच स्प्रेड की तुलना में कुल उधारी पर ब्याज दर और जमा दर के बीच स्प्रेड कम हुआ है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने असुरक्षित ऋण पर जोखिम अधिभार बढ़ाकर दबाव और बढ़ा दिया है। इसकी वजह से ज्यादा मुनाफा वाले असुरक्षित ऋण, जैसे व्यक्तिगत ऋण पर जोर देना कम कर दिया है और धीमी रफ्तार से इस पर बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से कर्ज पर यील्ड के साथ मुनाफे पर असर पड़ेगा।

इसके अलावा पूंजी बाजार पर यील्ड बढ़ा हुआ बना है। इसकी वजह से जमा दरों में मौजूदा अवधि के दौरान ब्याज दरें और बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही ऋण और जमा का अनुपात भी बढ़ा हुआ बना है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि ऐसे में लायबिलिटी फ्रेंचाइजी में वृद्धि, ऋण की वृद्धि दर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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First Published - June 6, 2024 | 9:55 PM IST

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