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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का मामला प्रणालीगत संकट नहीं, स्थिति हमारे नियंत्रण में: संजय मल्होत्रा

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई

Last Updated- February 23, 2026 | 10:30 PM IST
Sanjay Malhotra, Governor, Reserve Bank of India
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज कहा कि नियामक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। मल्होत्रा ने कहा, ‘हम घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है।’ इससे पहले, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य

कार्याधिकारी वी वैद्यनाथन ने कहा था कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिये हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था। यह किसी प्रणालीगत ‘रिपोर्टिंग’ त्रुटि का मामला नहीं है।

इस बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि उसकी चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े अकाउंट्स से जुड़ा 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी  ‘अलग’ घटना है, जो कुछ कर्मचारियों और बाहरी पक्षों के बीच कथित मिलीभगत से हुई थी, जिसमें कर्मचारियों ने बैंक के बाहर के लाभार्थी को पैसे ट्रांसफर किए थे। बैंक ने स्पष्ट किया कि इसमें शामिल लोगों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा नियामक और ऑडिटरों को मामले की जानकारी दे दी गई है।  

धोखाधड़ी की घटना से बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर 16.18 फीसदी गिरकर 70.04 रुपये पर बंद हुआ।

इस बीच, बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व का कोई भी सदस्य इस धोखाधड़ी में शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और वह इस घटना के असर को झेलने में सक्षम है।  वैद्यनाथन ने कहा, ‘यह एक खास तरह की अलग घटना है जो एक शाखा में एक ग्राहक समूह के साथ हुई है। यह असल में एक ऐसा मामला है जहां ग्राहक से निकासी के निर्देश मिले थे और कुछ कर्मचारियों ने ग्राहक के खाते से बैंक के बाहर कुछ पक्षों को पैसे का अंतरण किया, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी का संकेत देता है।

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First Published - February 23, 2026 | 10:30 PM IST

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