facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वृद्धिशील ऋण में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत घटी

Advertisement

सितंबर 2024 में वृद्धिशील ऋण में निजी क्षेत्र के कर्जदाताओं की हिस्सेदारी मामूली घटकर 45.5 प्रतिशत रह गई, जो सितंबर 2023 में 45.9 प्रतिशत थी।

Last Updated- October 10, 2024 | 10:57 PM IST
Bond Market

सितंबर 2024 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वृद्धिशील ऋण में हिस्सेदारी 3 प्रतिशत घटकर 51 प्रतिशत रह गई है। यह एक साल पहले 54 प्रतिशत थी। इसकी वजह यह है कि सरकारी बैंकों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और असुरक्षित ऋण के लिए ऋण वितरण की गति को धीमा कर दिया है।

सितंबर 2024 की नीतिगत समीक्षा के साथ जारी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धिशील ऋण में सरकारी बैंकों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है। हालांकि निजी और विदेशी बैंकों की तुलना में यह हिस्सेदारी घटी है।

सितंबर 2024 में वृद्धिशील ऋण में निजी क्षेत्र के कर्जदाताओं की हिस्सेदारी मामूली घटकर 45.5 प्रतिशत रह गई, जो सितंबर 2023 में 45.9 प्रतिशत थी। विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी सितंबर 2023 के 0.5 प्रतिशत से कम थी जो सितंबर 2024 में बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो गई है। मौद्रिक नीति रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में सरकारी बैंकों का ऋण सालाना आधार पर 12.9 प्रतिशत बढ़ा है, जो निजी बैंकों के 16.4 प्रतिशत की तुलना में कम है।

इक्रा में फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स के को-ग्रुप हेड अनिल गुप्ता ने कहा कि सरकारी बैंक वित्त और आवास वित्त कंपनियों को पर्याप्त ऋण देते रहे हैं। बहरहाल उन्होंने नवंबर 2023 में नियामकीय चेतावनी और जोखिम अधिभार बढ़ने के बाद एनबीएफसी को ऋण देना कम कर दिया है।

Advertisement
First Published - October 10, 2024 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement