RBI MPC Meet: वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ते महंगाई जोखिमों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखा। केंद्रीय बैंक ने ‘देखो और इंतजार करो’ (wait and watch) का रुख अपनाते हुए नीतिगत रुख तटस्थ (neutral) बनाए रखा। इस बीच, अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम और दरों में यथास्थिति के फैसले से बॉन्ड बाजार को राहत मिली, जिसके चलते 10-वर्षीय यील्ड करीब 0.12% गिरकर 7% के नीचे आ गया। मौजूदा संकेत बताते हैं कि ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए शॉर्ट-टर्म और 1–3 साल के बॉन्ड बेहतर अवसर दे सकते हैं, जबकि लंबी अवधि के निवेश में भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता जरूरी बनी रहेगी।
मिरे असेट में फिक्स्ड इनकम हेड बसंत बाफना ने कहा कि RBI नीति से पहले बाजारों ने इस अस्थायी युद्धविराम की खबर को सकारात्मक रूप से लिया, जिसके चलते बेंचमार्क यील्ड्स में लगभग 12 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई, जबकि कॉरपोरेट बॉन्ड और मनी मार्केट यील्ड्स में भी लगभग 10–15 बेसिस पॉइंट्स की समान हलचल देखी गई।
हालांकि, अतिरिक्त ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMOs) या FCNR (B) विंडो को फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं होने के कारण, नीति बैठक के बाद यील्ड्स कुल मिलाकर स्थिर (broadly stable) बने रहे।
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टाटा एसेट मैनेजमेंट में फिक्स्ड इनकम के डिप्टी हेड अमित सोमानी ने कहा कि हमारा मानना है कि 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड (G-sec) यील्ड निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय रुपये की चाल पर प्रतिक्रिया देती रहेगी। हालांकि यह 6.85% से 7.15% के आकर्षक दायरे में कारोबार करती रहेगी।
शॉर्ट-टर्म यील्ड्स हाल की ऊंची रेंज से नीचे आ सकती हैं, क्योंकि मौसमी वर्ष-अंत की तंगी के बाद लिक्विडिटी स्थितियां आसान हो रही हैं। यदि भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर होती है, तो 1-वर्षीय CDs अपनी वर्तमान रेंज के निचले स्तर की ओर बढ़ सकती हैं और 7% से नीचे भी जा सकती हैं।
श्रीराम वेल्थ में COO और प्रोडक्ट हेड नवल कगलवाला ने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियां (G-sec) यील्ड्स नीति के बाद हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष में अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद यील्ड्स में 10–20 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखी गई थी।
सोमानी ने कहा कि RBI ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखना आवश्यक है। हमें उम्मीद है कि RBI लिक्विडिटी ऑपरेशंस को इस तरह जारी रखेगा कि ओवरनाइट रेट पॉलिसी कॉरिडोर के निचले स्तर पर बना रहे।
कगलवाला ने कहा कि RBI द्वारा पर्याप्त सिस्टम लिक्विडिटी बनाए रखने के आश्वासन और ऊंची यील्ड्स को देखते हुए वे कर्व के छोटे (short end) हिस्से पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए हुए हैं।
डीएसपी म्युचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम के हेड संदीप यादव ने कहा कि ईरान से जुड़ा युद्ध RBI की भविष्य की नीति दिशा को प्रभावित करेगा। लेकिन यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि लंबा युद्ध हमेशा ब्याज दरों में बढ़ोतरी ही लाएगा। ऐसा भी हो सकता है कि इससे आर्थिक वृद्धि धीमी हो, और परिणामस्वरूप ब्याज दरें कम हों। हमारे अनुसार, अभी ब्याज दरों में बढ़ोतरी (rate hikes) की बात करना जल्दबाजी होगी।
गवर्नर के भाषण में El Niño का जिक्र भी सामने आया है, जो आने वाले महीनों में चर्चा का केंद्र रहेगा। हालांकि भारत के पास अनाज (cereals) का मजबूत भंडार है, इसलिए El Niño से जुड़े जोखिम महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन पहले की तुलना में कम प्रभावशाली हो सकते हैं।
PGIM इंडिया म्युचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम हेड पुनीत पाल ने कहा कि आज की MPC नीति संतुलित रही, जिसमें तटस्थ (neutral) रुख देखने को मिला। उन्होंने कहा कि हालांकि बॉन्ड बाजार को नीतिगत दरों में यथास्थिति (status quo) की उम्मीद थी, फिर भी नीति के टोन और रुख को लेकर कुछ चिंता बनी हुई थी। उनके अनुसार, MPC का रुख तटस्थ से नरम (neutral to dovish) रहा और ब्याज दरों में तुरंत किसी बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि MPC आगे भी डेटा पर आधारित (data dependent) रहेगी और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष की अवधि और तीव्रता ही निकट अवधि में बॉन्ड बाजार की दिशा तय करेगी।
लंबी अवधि (remain long) का रुख बनाए रखें। आज यील्ड कर्व के विभिन्न हिस्सों में यील्ड्स 10–15 बेसिस पॉइंट्स तक गिर चुकी हैं। यादव ने कहा कि हमारा मानना है कि मनी मार्केट सेगमेंट में यील्ड्स आगे और नीचे जा सकती हैं। हालांकि, ड्यूरेशन (duration) पर असर काफी हद तक ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध की स्थिति पर निर्भर करेगा। लेकिन हालिया युद्धविराम यह संकेत देता है कि यील्ड्स में हल्की गिरावट की संभावना है, क्योंकि:
बाफना ने कहा कि बाजार यह अपेक्षा कर रहे है कि ब्याज दरों में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं होगा। यील्ड कर्व में आगे भी steepening bias जारी रहने की संभावना है, यानी लंबी अवधि की यील्ड्स शॉर्ट टर्म की तुलना में ज्यादा बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही 1 से 3 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड सेगमेंट को आकर्षक माना जा रहा है, क्योंकि वहां स्प्रेड लगभग 225–250 बेसिस पॉइंट्स तक है, जो कि ओवरनाइट रेट्स की तुलना में ऐतिहासिक औसत से अधिक है।
कुल मिलाकर, RBI की नीति स्थिरता और सतर्कता का संतुलन दिखाती है। मजबूत घरेलू ग्रोथ के बावजूद, महंगाई और वैश्विक जोखिम आने वाले समय में बॉन्ड यील्ड्स और बाजार की दिशा तय करते रहेंगे।