इस हफ्ते कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने में तेजी देखी गई और कंपनियों/संस्थानों ने इससे करीब 27,000 करोड़ रुपये जुटाए। बॉन्ड यील्ड में गिरावट से उधार लेने की लागत कम हुई, जिससे कंपनियों ने बॉन्ड जारी करना शुरू कर दिया। अगले हफ्ते भी बॉन्ड बाजार में व्यस्तता रहेगी। हाउसिंग ऐंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) अगले हफ्ते बॉन्ड से कुल 13,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहे हैं।
विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (बी) जमा, बाह्य वाणिज्यिक उधारी और दूसरे तरीकों से पूंजी जुटाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों और नीतिगत समर्थन से पूंजी जुटाने की स्थिति सुधरने और रुपये को स्थिर करने में मदद मिलेगी। अच्छी रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड पर यील्ड लगभग 50 से 70 आधार अंक तक कम हुई है। इस हफ्ते 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में करीब 9 आधार अंक की कमी देखी गई।
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में प्राथमिक बाजारों में काफी कम गतिविधियां देखी गईं लेकिन अब इसमें तेजी आई है। ऊंची यील्ड की वजह से उधार लेने वालों ने बैंक ऋण का सहारा लिया। अप्रैल और मई में भारतीय कंपनियों ने घरेलू बॉन्ड बाजार से केवल 1.07 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 58 फीसदी कम है। यह वित्त वर्ष 2023 के बाद से किसी भी वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में जुटाई गई सबसे कम रकम है।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘हाल ही में कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने में आई तेजी दिखाती है कि जारीकर्ता बॉन्ड बाजार का रुख कर रहे हैं ताकि वे अनुकूल समय में अपनी पूंजी की जरूरतें पूरी कर सकें।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि हाल तक फ्लोटिंग दर ढांचे की काफी मांग थी लेकिन अब कई बॉन्ड जारीकर्ता बेंचमार्क दर बदलने के जोखिम के बजाय मौजूदा यील्ड पर पूंजी जुटाने में सहज महसूस कर रहे हैं।’
नैशनल बैंक फॉर फाइनैंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट (नैबफिड), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हाउसिंग ऐंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको), लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) और एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस जैसे संस्थानों ने बॉन्ड से पूंजी जुटाई है या उनकी आने वाले दिनों में बॉन्ड बाजार में जाने की योजना है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की बजाज फाइनैंस, बजाज हाउसिंग फाइनैंस, टाटा कैपिटल, टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनैंस, एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज, सुंदरम फाइनैंस, कोटक महिंद्रा प्राइम और एलऐंडटी फाइनैंस ने भी हाल के समय में बॉन्ड बाजार से पूंजी जुटाई हैं या उनकी बाजार में जाने की योजना है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र को कर्ज मुहैया कराने वाली नैबफिड ने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिये आज 5,000 करोड़ रुपये जुटाए। इस संस्थान ने 10 साल के बॉन्ड के लिए 7.66 फीसदी यील्ड पर 2,500 करोड़ रुपये और 3 साल वाले बॉन्ड से 7.37 फीसदी यील्ड पर 2,500 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कीं।
अलग-अलग परिपक्वता वाले बॉन्ड जारी करने की गतिविधि भी बढ़ी है। 3 साल वाले बॉन्ड के लिए म्युचुअल फंड और बैंकों की ट्रेजरी से मांग बनी हुई है वहीं कई जारीकर्ताओं ने 5 साल और 10 साल वाले बॉन्ड के जरिये भी पूंजी जुटाए हैं। बाजार में शामिल लोगों का कहना है कि ब्याज दरों, महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और दुनिया भर में भू-राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर मध्यम अवधि के परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता के बीच कर्ज लेने वाले अपनी देनदारियों की अवधि बढ़ाने और लंबी अवधि के लिए पूंजी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
कैपरी ग्लोबल कैपिटल लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक (एफआईएम हेड) अजय मंगलुनिया ने कहा, ‘अनिश्चितता के कारण कई बॉन्ड जारीकर्ताओं ने अपनी उधारी की योजनाओं को टाल दिया था। अब जब बाजार में स्थिरता आई है, यील्ड घटी है और आरबीआई के उपायों से लिक्विडिटी और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला है तो वे फिर से बॉन्ड बाजार में वापस आ रहे हैं। इससे कॉरपोरेट बॉन्ड की आपूर्ति में तेजी आई है।’