कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण मंगलवार को रुपये और बॉन्ड में तेजी आई। इससे वित्तीय बाजारों में जोखिम को लेकर धारणा में सुधार आया।। ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह गईं, जो सोमवार को 116.8 डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। रुपया 91.81 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जबकि एक दिन पहले प्रति डॉलर 92.33 पर बंद हुआ था। सोमवार को डॉलर सूचकांक में इजाफे, घरेलू शेयर बाजारों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन में हुई बढ़ोतरी के कारण स्थानीय मुद्रा नए निचले स्तर पर जा पहुंची थी। डीलरों ने यह जानकारी दी।
कारोबारियों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर बिक्री के जरिये संभावित हस्तक्षेप किया हो सकता है क्योंकि स्थानीय मुद्रा 92.20 प्रति डॉलर से तेजी से 92 प्रति डॉलर से कम हो गई, जो आमतौर पर केंद्रीय बैंक की मौजूदगी का संकेत होता है।
सरकारी बैंक के एक डीलर ने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को काफी मजबूती मिली। 92.20 डॉलर प्रति डॉलर के स्तर पर भी कुछ हस्तक्षेप हुआ। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से गिरकर लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गईं, जिससे रुपये पर दबाव कम हुआ और इसमें मजबूती आई।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, डॉलर सूचकांक एक बार फिर 100 के स्तर को पार नहीं कर सका क्योंकि यह 99.50 से गिरकर लगभग 98.50 पर आ गया जबकि यूरो, पाउंड और येन में तेजी आई। ट्रंप के युद्ध जल्द समाप्त करने और तेल की कीमतें कम करने के प्रयासों की बात कहने के बाद जोखिम संबंधी धारणा बेहतर हुई।
बॉन्ड बाजार में हाल में आयोजित ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) खरीद नीलामी में आक्रामक कटौती के बाद यील्ड में नरमी आई। केंद्रीय बैंक ने बाजार के मौजूदा स्तर से अधिक कीमतों पर प्रतिभूतियां खरीदीं, जिससे बाजार का माहौल स्थिर हुआ। बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड पिछले बंद भाव 6.72 फीसदी के मुकाबले 6.67 फीसदी पर स्थिर हुआ।
ट्रेडरों का कहना है कि केंद्रीय बैंक से निरंतर लिक्विडिटी सहायता की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बॉन्डों की मांग में सुधार हुआ है।
करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वी आर सी रेड्डी ने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को मजबूती मिली, जिससे जोखिम को लेकर समग्र सेंटिमेंट में सुधार हुआ जबकि केंद्रीय बैंक के समय-समय पर हस्तक्षेप से भी मुद्रा में अस्थिरता सीमित करने में मदद मिली। बॉन्ड बाजार में हाल में हुई ओएमओ नीलामी में आक्रामक कटौती के बाद यील्ड में नरमी आई, जिससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि आरबीआई आगे बॉन्ड खरीद के माध्यम से लिक्विडिटी जारी रख सकता है, जिससे सरकारी प्रतिभूतियों की मांग को समर्थन मिल रहा है।