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नियामक और संस्थानों के बीच सहयोग जरूरी, प्रतिबंध और जुर्माना अंतिम विकल्प: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा

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गवर्नर ने कहा कि नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं को नियामक उम्मीदों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है

Last Updated- January 09, 2026 | 9:55 PM IST
rbi governor sanjay malhotra

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि नियामक और विनियमित संस्थाओं के बीच संबंध सहयोगात्मक हैं और वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता के साझा मकसद के विपरीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं पर जुर्माना और कारोबार पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाई अंतिम विकल्प हैं।

गवर्नर ने कहा कि नियमन के दायरे में आने वाली संस्थाओं को नियामक उम्मीदों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मॉडल, भागीदार, डेटा और डिजिटल डिलीवरी से जोखिम के नए रूप सामने आए हैं।

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मल्होत्रा ने कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर्स के तीसरे सालाना वैश्विक सम्मेलन के दौरान कहा, ‘उन्हें नियमन के मकसद को आत्मसात करने की जरूरत है, न कि सिर्फ तकनीकी आधार पर उसके अनुपालन की संस्कृति डालने की जरूरत है। इसकी भावना का पालन करना महत्त्वपूर्ण है। हमारा प्रयास एक सामान्य समझ विकसित करना होना चाहिए, जो खींचतान कम कर सके और परिणामों में सुधार कर सके।’

ग्राहकों के लिए तकनीक के इस्तेमाल के लाभों पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्होत्रा ने कहा कि मकसद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि डिजिटलीकरण और नवोन्मेष ग्राहकों के हित में हों। उन्होंने अपारदर्शी मूल्य निर्धारण और अनुचित वसूली प्रथाओं से बचाने के लिए व्यवस्था बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

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First Published - January 9, 2026 | 9:43 PM IST

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