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ईसीएलजीएस 5.0 योजना से पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऋण वृद्धि पर छाया संकट भी होगा दूर

Last Updated- May 06, 2026 | 10:34 PM IST
Banks
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई बाधा और इस क्षेत्र में वृद्धि के पटरी से उतरने के खतरे के बीच सरकार ने मंगलवार को आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के 5वें संस्करण  की घोषणा की है। इस नई योजना से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में नए बैंक ऋण बढ़ेंगे और परिसंपत्ति-गुणवत्ता का जोखिम भी कम होगा। वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू बैंकों ने ऋण वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई क्षेत्र पर खूब दांव लगाया मगर पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वित्त वर्ष 2027 में इस क्षेत्र में दबाव दिख रहा है। 

इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्या​धिकारी विनोद कुमार ने कहा, ‘योजना की घोषणा मंगलवार रात ही हुई है इसलिए मोटे अनुमान के अनुसार इससे लगभग 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये के दायरे में अतिरिक्त ऋण आंवटन हो सकता है।’

कुमार ने कहा, ‘सभी कर्जदार इस विकल्प को नहीं चुन सकते हैं। अतीत में भी, कई सुदृढ़ कर्जदार ने इस योजना का लाभ नहीं उठाया था। जो अपने दम पर टिके रह सकते हैं, वे इसे न चुनने का विकल्प अपना सकते हैं, भले ही ब्याज दर और अन्य शर्तें आकर्षक हों।’

सरकार को उम्मीद है कि नई योजना विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये सहित लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुगम बनाएगी।

जेऐंडके बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्या​धिकारी अमिताभ चटर्जी ने नई योजना की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत अच्छा कदम है और पूरे बैंकिंग उद्योग को लाभान्वित करेगा। हम एमएसएमई-केंद्रित बैंक हैं, इसलिए हमारे लिए यह निश्चित रूप से मजबूत समर्थन प्रदान करेगा। मेरी टीम ने मोटा अनुमान लगाया है कि इस क्रेडिट गारंटी से हमारी ऋण वृद्धि विशेष रूप से 20 से 22 फीसदी तक बढ़ सकती है।’

एसबीआई रिसर्च के अनुसार यह उपाय लि​​क्विडिटी को सहारा देगा, नौकरियों की रक्षा करेगा, आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को मजबूत करेगा। इसका अनुमान है कि लगभग 11 करोड़ एमएसएमई खाते (कुल एमएसएमई पोर्टफोलियो का लगभग 45 फीसदी) योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। प्रति खाते औसत अतिरिक्त ऋण प्रवाह 2 लाख से 2.3 लाख रुपये अनुमानित है।

विमानन क्षेत्र को भी इससे काफी फायदा होने की उम्मीद है। एसबीआई रिसर्च ने कहा कि विमानन क्षेत्र को 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन, मार्च 2026 तक इस क्षेत्र के 526 अरब रुपये के बकाया ऋण का लगभग 9.5 फीसदी होगा।

ब्रोकरेज इक्विरस सिक्योरिटीज ने कहा कि यह योजना तिमाही आधार पर कर्ज की लागत को सीमित करके ऋण वृद्धि का समर्थन करने के साथ-साथ जोखिम को नियंत्रित कर सकता है। संप्रभु गारंटी वृद्धिशील जोखिम को काफी हद तक कम करती है।

नियामकीय उपायों से हाल के वर्षों में एमएसएमई को बैंक ऋण में तेज वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2026 में एमएसएमई ऋण में सालाना आधार पर लगभग 27 फीसदी का इजाफा हुआ है जिससे कुल बैंक ऋण में इस खंड की हिस्सेदारी बढ़कर 18.5 फीसदी हो गई। भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सहित प्रमुख ऋणदाताओं ने अपने लोन बुक का करीब 15 से 20 फीसदी ऋण एमएसएमई को दिया है।

इ​क्विरस सिक्योरिटीज के अनुसार लाभार्थियों की संख्या के हिसाब से छोटे उद्यमों का हिस्सा लगभग 83 फीसदी था जबकि कुल गारंटीड ऋण आवंटन में बैंकों का हिस्सा लगभग 86 फीसदी था। 

मैक्वेरी रिसर्च के सुरेश गणपति के अनुसार ईसीएलजीएस ने एमएसएमई और व्यापक वित्तीय प्रणाली दोनों का समर्थन किया है। यह योजना कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद तरलता बढ़ाने में व्यापक काम किया है। इसके तहत 31 मार्च, 2023 तक 3.61 लाख करोड़ रुपये की गारंटी और 2.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज आवंटन हुआ। इसे लगभग 14.6 लाख एमएसएमई इकाइयों को बंद होने से बचाने और छोटे व्यवसाय के डिफॉल्ट करने से बचाने में मदद की है। साथ ही इसे अनुमानित 1.5 करोड़ नौकरियों की रक्षा करने का श्रेय दिया जाता है।

ईसीएलजीएस को मूल रूप से कोविड-19 महामारी के आर्थिक झटके को कम करने के लिए लाया गया था। उस समय लगभग 23-24 फीसदी पात्र कर्जदारों ने इस सहायता का लाभ उठाया जिससे व्यवसायों को व्यवधान के दौरान तरलता बनाए रखने में मदद मिली।

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First Published - May 6, 2026 | 10:25 PM IST

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