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फिनो पेमेंट्स बैंक संकट के बाद फिनटेक कंपनियों में हड़कंप, अब CEO-CFO खुद संभाल रहे कमान

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फिनो बैंक संकट के बाद फिनटेक कंपनियां सतर्क हैं। सीईओ अब खुद नियंत्रण रख रहे हैं और नियम मानने वाली कंपनियों के लिए कानूनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं

Last Updated- March 23, 2026 | 10:12 PM IST
Fino Payments Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

फिनो पेमेंट्स बैंक प्रकरण से पैदा हुए संकट के बाद वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) और भुगतान कंपनियों ने अपने आंतरिक नियंत्रणों में सख्ती शुरू कर दी है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां अपने पास रख रहे हैं। यह कदम कर्मचारियों या मध्यस्थों की गतिविधियों के कारण उत्पन्न जिम्मेदारियों के बीच उठाया जा रहा है। 

कंपनी प्रमुखों का कहना है कि कानूनी सुरक्षा के नियम स्पष्ट होने चाहिए। उनका मानना है कि अगर कोई कंपनी सभी नियामकीय नियमों का पालन कर रही है तो उन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि बाद में उसके खिलाफ पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं की जाएगी, खासतौर पर इसलिए कि भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। 

एक भुगतान कंपनी के प्रमुख ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘हमें आगे बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। कई अहम जिम्मेदारियां अब सिर्फ उन लोगों को दी जा रही हैं जिनकी जवाबदेही बहुत अधिक है। एक कंपनी के प्रमुख के तौर पर मैं रोजमर्रा के कामों की निगरानी नहीं कर सकता और मुझे यह पता नहीं होता कि किसी समस्या की जड़ क्या है जो एक दिन हमारे लिए परेशानी बन सकती है।’

एक अन्य भुगतान कंपनी के प्रमुख ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमन दायरे में कार्यरत कंपनियों को कानूनी सुरक्षा मिलना चाहिए जब तक कि इसमें किसी प्रकार की साजिश या जानबूझकर गलत काम का स्पष्ट प्रमाण न हो।

इस व्यक्ति ने बताया कि यह मांग ऐसे समय में उठ रही है जब कंपनियां पहले से ही सभी जरूरी जांच प्रक्रियाएं पूरी कर रही हैं। इसमें नो योर कस्टमर (केवाईसी), कारोबारी के बारे में छानबीन और ब्लैकलिस्ट में नाम होने की जांच जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं और हर दिन सैकड़ों नए व्यापारियों को जोड़ने के साथ यह सब जांच की जाती है। 

उन्होंने कहा, ‘हम पहले से ही व्यापारियों (मर्चेंट) को जोड़ने से पहले काफी जांच करते हैं। हम देखते हैं कि उनकी वेबसाइट असली है या नहीं, उस पर असली उत्पाद हैं या नहीं। साथ ही, हम यह भी देखते हैं कि वे कार्ड नेटवर्क, एनपीसीआई मर्चेंट डेटाबेस, जीएसटी और एफआईयू जैसी संस्थाओं की ब्लैकलिस्ट में तो नहीं हैं। ऐसे में अगर कारोबारी कोई गलती करता है तो नियमों का पालन करने वाले हमारी जैसे मध्यस्थ को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, वरना तो इसका कोई ओर-छोर नहीं है।’

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि फिनो पेमेंट्स बैंक के प्रमुख की गिरफ्तारी से कुछ हद तक अनिश्चितता और आशंकाएं जरूर बढ़ी है, लेकिन डिजिटल भुगतान को सक्षम करने वाले पूरे तंत्र की सुरक्षा जरूरी है।

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First Published - March 23, 2026 | 10:12 PM IST

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