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HDFC बैंक ने निवेशकों को आश्वस्त किया, बोर्ड और प्रबंधन ने संचालन और स्थिरता पर भरोसा जताया

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अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के नेतृत्व ने हितधारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं

Last Updated- March 19, 2026 | 10:38 PM IST
HDFC Bank Leadership crisis

अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के नेतृत्व ने हितधारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। प्रबंधन और बोर्ड ने सामूहिक रूप से बैंक के संचालन, स्थिरता और भविष्य की दिशा पर स्पष्टता पर मीडिया के साथ बातचीत की…

पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा पर क्या चक्रवर्ती से फिर से विचार करने के लिए कहने का बोर्ड की ओर से कोई प्रयास किया गया?

मिस्त्री: बोर्ड के सदस्यों ने चक्रवर्ती से उनकी विशिष्ट शिकायतों या चिंताओं के बारे में पूछा था, लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी कोई विशेष चिंताएं नहीं हैं।

इस घटना से प्रतिष्ठा को जो नुकसान पहुंचा है, उसके बारे में बैंक क्या करेगा?

मिस्त्री: मैनेजमेंट टीम और बोर्ड के तौर पर हम सब एक हैं। मैनेजमेंट अगले एक-दो दिन में सभी प्रमुख शेयरधारकों से बात करेगा। लोगों के मन में जो भी डर हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। मुझे नहीं लगता कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ा कोई भी मसला है। निवेशकों का भरोसा वापस जीतना बस समय की बात है और मुझे यकीन है कि लोग बात को समझेंगे, खुद आरबीआई ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें उसने बैंक के कामकाज के तरीके पर अपनी संतुष्टि जाहिर की है।

ऐसे वक्त में क्या बोर्ड वाकई सीईओ बदलने का जोखिम उठा सकता है?

मिस्त्री: नामांकन और पारिश्रमिक समिति निश्चित रूप से अगले एक महीने या उसके आगे बैठक करेगी और सिफारिशें सौंपेगी जिन्हें बोर्ड मंजूरी देगा और फिर आरबीआई को सूचित किया जाएगा।

‘बैफलिंग’ (रहस्यमय) शब्द का इस्तेमाल किया गया, क्या यह उच्च स्तर पर आंतरिक संचार की विफलता का संकेत है?

मिस्त्री: बोर्ड के एक सदस्य ने ‘बैफलिंग’ शब्द का क्यों इस्तेमाल किया, सच में वह हमें भी नहीं समझ आया कि कल चेयरमैन ने इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों दी। हर बड़े संगठन में इस तरह के मसले होते रहते हैं, जो बैंक में भी हुए होंगे, लेकिन संचालन के दृष्टिकोण से कुछ और नहीं है। कृपया मेरा भरोसा करें कि एचडीएफसी समूह की संचालन प्रतिष्ठा है।

क्या इस्तीफे के बाद आरबीआई ने बैंक से कोई स्पष्टीकरण मांगा?

जगदीशन: दो पूर्णकालिक सदस्य और दो स्वतंत्र निदेशक कल इस मुद्दे पर आरबीआई को जानकारी देने गए थे। आरबीआई का रुख बेहद मददगार था और इस समर्थन का प्रमाण यह है कि उसने अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष को बहुत जल्द मंजूरी दे दी, क्योंकि उसे बोर्ड और प्रबंधन, संस्था और लंबे समय के इस ब्रांड में काफी विश्वास और समर्थन है।

क्या कोई ऐसा मसला है जिसे बैंक बाद में ठीक करना चाहता है, या फिर कोई मसला ही नहीं है?

मिस्त्री: ऐसा कोई मसला नहीं है जिसे आरबीआई ने असल में उठाया हो और हमसे उसे ठीक करने के लिए कहा हो।

जगदीशन: बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ी संस्था और बहुत ही अहम संस्था होने के नाते, हम पर नियामकीय निगरानी बहुत ही गहन तरीके से रखी जाती है। इसमें सिर्फ इंस्पेक्शन ही नहीं होते, बल्कि नियमित आधार पर नियामक थीमैटिक सुपरविजन भी करता है – चाहे वह आरबीआई हो, जो हमारा मुख्य नियामक है, या फिर कोई सहायक नियामक हो।

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First Published - March 19, 2026 | 10:32 PM IST

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