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RBI और ESMA के एमओयू पर भारत को नए सिरे से बातचीत की जरूरत: सीसीआईएल मान्यता पर विवाद

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भारत के लिहाज से देखा जाए तो इस मुद्दे को सुलझाना बेहद जरूरी है। इसके लिए ईएमआईआर नियमों की समीक्षा के बाद उसमें बदलाव करने की जरूरत है

Last Updated- March 12, 2026 | 10:43 PM IST
RBI and ESMA

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और यूरोपियन सिक्योरिटीज ऐंड मार्केट्स अथॉरिटी (ईएसएमए) के बीच हाल में हुए समझौते पर नए सिरे से बातचीत करनी पड़ सकती है। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत की चिंताओं को सही तरीके से दूर नहीं किया गया तो समझौते पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है।

आरबीआई और यूरोपीय संघ के वित्तीय बाजार नियामक एवं निरीक्षक ईएसएमए ने जनवरी में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। वह समझौता ज्ञापन भारत-यूरोपीय संघ व्यापार करार का हिस्सा था। इसका उद्देश्य भारत में स्थापित एवं भारतीय नियामक द्वारा विनियमित सेंट्रल काउंटरपार्टीज (सीसीपी) को मान्यता देने के लिए सहयोग एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य आरबीआई और ईएसएमए के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को दूर करना है। ईएसएमए ने क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) जैसे भारतीय सेंट्रल काउंटरपार्टीज के बहीखातों का ऑडिट करने की मांग की थी। मगर यह इस बात पर निर्भर था कि भारतीय नियामक की चिंताओं को यूरपियन मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर रेगुलेशन (ईएमआईआर) के अगले संस्करण में दूर किया जाए।

भारत के नजरिये से देखा जाए तो यूरोपीय संघ के नियामक की इस मांग को क्षेत्राधिकार से इतर माना जा रहा है। सीसीआईएल न तो भारत के बाहर मौजूद है और न ही विदेश में उसका कोई कारोबार है। मगर ईएसएमए वह शक्ति हासिल करना चाहता है जिससे भारत में काम करने वाले यूरोपीय बैंक ईएमआईआर मानदंडों का अनुपालन करें।

ईएसएमए ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि समझौता ज्ञापन सीसीआईएल को ईएमआईआर के तहत मान्यता के लिए नए सिरे से आवेदन करने की अनुमति देता है। सीसीआईएल भारत में स्थापित एक सेंट्रल काउंटरपार्टी है जिसकी निगरानी आरबीआई करता है।

आरबीआई ने कहा कि यह एमओयू ईएसएमए के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करता है ताकि वह आरबीआई की नियामकीय एवं निगरानी संबंधी गतिविधियों पर भरोसा कर सके और यूरोपीय संघ की वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित रख सके। सीसीआईएल अगर ईएमआईआर की मान्यता के लिए आवेदन करता और उससे एक संबंध बनता है तो उसे ईएमआईआर नियमों के हिसाब से चलना पड़ेगा। यही कारण है कि इसे क्षेत्राधिकार से इतर माना जा रहा है।

भारत के लिहाज से देखा जाए तो इस मुद्दे को सुलझाना बेहद जरूरी है। इसके लिए ईएमआईआर नियमों की समीक्षा के बाद उसमें बदलाव करने की जरूरत है।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय नियामक को उम्मीद है कि ईएमआईआर के अगले संस्करण में चिंताओं का समाधान हो जाएगा। अगर ईएमआईआर के आगामी संस्करण में इन चिंताओं को दूर नहीं किया गया तो ईएसएमए के साथ-साथ एमओयू पर भी नए सिरे से बातचीत करनी पड़ सकती है।

यह गतिरोध अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ था जब ईएसएमए ने कहा था कि वह सीसीआईएल सहित उन 6 भारतीय सेंट्रल काउंटरपार्टीज की मान्यता रद्द कर देगा जो सरकारी बॉन्ड एवं ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप के लिए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होस्ट करते हैं। यह फैसला आरबीआई द्वारा विदेशी कंपनियों को सीसीआईएल के ऑडिट एवं निरीक्षण का अधिकार दिए जाने से इनकार करने के बाद लिया गया था।

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First Published - March 12, 2026 | 10:36 PM IST

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