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GST सुधार और FDI का असर: बीमा क्षेत्र में फिर आएगी रफ्तार, FY27 में डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद

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विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रोथ डबल डिजिट में पहुंच जाएगी। नियामक सुधार, GST में बदलाव, आसान बेस इफेक्ट और मुख्य प्रोडक्ट्स में बढ़ती डिमांड इसके मुख्य कारण हैं

Last Updated- December 28, 2025 | 5:15 PM IST
Insurance sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इस साल यानी FY26 में बीमा क्षेत्र की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, लेकिन अगले साल FY27 में फिर से तेजी आने के आसार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रोथ डबल डिजिट में पहुंच जाएगी। नियामक सुधार, GST में बदलाव, आसान बेस इफेक्ट और मुख्य प्रोडक्ट्स में बढ़ती डिमांड इसके मुख्य कारण हैं।

बड़े सुधारों ने खोला नया रास्ता

बीमा क्षेत्र के लिए 2025 एक अहम साल साबित हुआ है। संसद में पास हुआ ‘सबका बीमा सबकी रक्षा बिल’ और 100 फीसदी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की इजाजत ने सेक्टर की तस्वीर ही बदल दी है। इससे विदेशी पूंजी, विशेषज्ञता और बड़े स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा।

बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO तपन सिंघेल कहते हैं, “ये बदलाव भारत के बीमा बाजार में विश्वास जगाते हैं। दुनिया भर से मजबूत दिलचस्पी दिख रही है। इससे ग्राहकों को ज्यादा पहुंच, बेहतर क्षमता और अच्छे बीमा विकल्प मिलेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि अब ध्यान इस सुधार को गहराई तक ले जाने पर होगा। इससे बीमा की पहुंच बढ़ेगी, नौकरियां पैदा होंगी और अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान मिलेगा। बीमा भारत के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

GST में बदलाव से कैसे मिल रहा फायदा?

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रोथ की रफ्तार अब बनने लगी है। नवंबर में लाइफ और नॉन-लाइफ दोनों बीमा कंपनियों ने करीब 23 फीसदी प्रीमियम ग्रोथ दर्ज की। इसका एक बड़ा कारण बीमा प्रीमियम पर GST का आसान होना है, जिससे पॉलिसी सस्ती हो गई और लोग ज्यादा खरीद रहे हैं।

अप्रैल से नवंबर FY26 तक सालाना ग्रोथ अभी ऊंची सिंगल डिजिट में है, लेकिन उद्योग के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जनवरी-मार्च तिमाही में तेज उछाल आएगा। ये तीन महीने बीमा बिक्री के लिए हमेशा सबसे अच्छे रहते हैं।

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यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO शरद माथुर कहते हैं, “अभी तक ग्रोथ 7-8 फीसदी के आसपास है। मार्च तक मुझे उम्मीद है कि ये डबल डिजिट में पहुंच जाएगी। जनवरी बड़ा महीना होगा क्योंकि नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ती है और पुरानी पॉलिसियों का रिन्यूअल भी बहुत होता है। जनवरी-फरवरी-मार्च हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के लिए टैक्स बचत के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।”

माथुर ने बताया कि हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस दो मुख्य क्षेत्र हैं जो कुल प्रीमियम ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं। हेल्थ इंश्योरेंस सबसे तेज बढ़ रहा है, उसके बाद मोटर इंश्योरेंस आता है। ये रफ्तार मार्च तक जारी रहेगी और सालाना ग्रोथ सिंगल डिजिट से डबल डिजिट में पहुंच जाएगी।

बेस इफेक्ट और नियामक बदलाव क्यों बना रहे उम्मीद मजबूत?

पहले के नियामक बदलावों का असर अब कम हो रहा है। लाइफ इंश्योरेंस में सरेंडर वैल्यू के नए नियम और नॉन-लाइफ में अकाउंटिंग बदलाव का प्रभाव सामान्य हो गया है, जिससे बेस आसान हो गया है। GST सुधार से पॉलिसी बिक्री में साफ बढ़ोतरी दिख रही है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों में बिकने वाली पॉलिसियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और पहले की गिरावट रुक गई है।

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, पिछले दस साल में भारत में बीमा कवरेज काफी बढ़ा है। कवर होने वाली जिंदगियों की संख्या तेजी से बढ़ी, खासकर ग्रुप और क्रेडिट लिंक्ड प्रोडक्ट्स की वजह से। लेकिन विश्लेषक कहते हैं कि अब आगे की ग्रोथ के लिए सिर्फ कवरेज बढ़ाना काफी नहीं। पर्याप्त सुरक्षा और रिटायरमेंट समाधान पर ध्यान देना होगा। इस क्षेत्र में मध्यम अवधि में मजबूत डिमांड दिख रही है।

लाइफ इंश्योरेंस का मध्यम अवधि का अनुमान क्या है?

केयरएज का मानना है कि FY26 और FY27 में लाइफ इंश्योरेंस उद्योग हर साल 8-11 फीसदी बढ़ेगा। इसका मुख्य कारण ग्रुप प्रोडक्ट्स, व्यक्तिगत पेंशन और प्रोटेक्शन प्लान होंगे। निकट भविष्य में प्रीमियम ग्रोथ में उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन हाल के नियामक बदलाव ग्राहकों के पक्ष में हैं और पॉलिसी जारी रखने की दर बेहतर होगी, इसलिए ग्रोथ स्थिर हो जाएगी।

जेनेराली सेंट्रल लाइफ इंश्योरेंस के MD और CEO अलोक रुंगटा कहते हैं कि लगातार नियामक सुधार, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST का आसान होना और डिजिटल समाधानों का तेजी से अपनाना प्रोडक्ट्स को सरल बना रहा है। इससे ग्राहक का अनुभव बेहतर हो रहा है और सर्विस स्टैंडर्ड ऊंचे हो गए हैं। आगे का नजारा सकारात्मक है।

रुंगटा ने कहा, “टर्म इंश्योरेंस का विस्तार जोर पकड़ रहा है और ग्रामीण बाजार में बड़ा मौका है। वहां लोगों की आय बढ़ रही है, जिससे सुरक्षा और बचत दोनों तरह के प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ेगी।”

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First Published - December 28, 2025 | 5:15 PM IST

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