facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

GST छूट का असर: 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के टर्म इंश्योरेंस कवर की मांग में तेज उछाल

Advertisement

पॉलिसी बाजार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में 2 करोड़ रुपये से अधिक की बीमित राशि वाली पॉलिसियों की बिक्री, कुल सावधि बीमा बिक्री का 34 प्रतिशत रही

Last Updated- June 01, 2026 | 10:43 PM IST
insurance

भारतीय उपभोक्ता बड़ी संख्या में 2 करोड़ रुपये से अधिक के सावधि बीमा कवर का विकल्प चुन रहे हैं। खुदरा सुरक्षा योजनाओं पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य किए जाने के सरकारी निर्णय के बाद ऐसा हुआ है। इस बदलाव से देश के सबसे बड़े निजी जीवन बीमा कंपनियों के पॉलिसी मिश्रण में बड़े बदलाव आ रहे हैं।

पॉलिसी बाजार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में 2 करोड़ रुपये से अधिक की बीमित राशि वाली पॉलिसियों की बिक्री, कुल सावधि बीमा बिक्री का 34 प्रतिशत रही। एक साल पहले इनकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी। सितंबर 2024 में जीएसटी छूट के कारण पॉलिसी खरीदने में 10 प्रतिशत का उछाय आया है। इस अवधि के दौरान 2 करोड़ रुपये से कम की पॉलिसियों का हिस्सा 76 प्रतिशत से घटकर 66 प्रतिशत रहा।

पॉलिसी बाजार में सावधि बीमा के प्रमुख वरुण अग्रवाल ने कहा, ‘लोग धीरे-धीरे उच्च बीमित राशि पॉलिसियों का विकल्प चुन रहे थे, लेकिन जीएसटी के बाद खरीदने का सामर्थ्य बढ़ा। प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, बढ़ी हुई जागरूकता और ग्राहकों द्वारा महंगाई दर और बढ़ती वित्तीय जिम्मेदारियों के कारण बड़े कवर की जरूरत महसूस करने के कारण यह हुआ है।’

Advertisement
First Published - June 1, 2026 | 10:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement