उच्च मूल्य वाली स्वास्थ्य पॉलिसियों की हिस्सेदारी बीते आठ महीनों में दोगुने से अधिक हो गई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया। इसके बाद 20 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये से अधिक की बीमा राशि वाली स्वास्थ्य पॉलिसियों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत के दौर में जीएसटी को तर्कसंगत बनाए जाने से ग्राहकों का खरीदने का सामर्थ्य बढ़ा है।
पॉलिसीबाजार के आंकड़ों के अनुसार 20 लाख रुपये से अधिक और 1 करोड़ रुपये से कम की बीमा राशि वाली स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की हिस्सेदारी जीएसटी बदलाव से पहले 11 प्रतिशत थी और अब बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है। हालांकि 1 करो़ड़ रुपये और उससे अधिक की पॉलिसियों की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 12 प्रतिशत हो गई है। इन दोनों की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई है।
पॉलिसीबाजार में स्वास्थ्य बीमा के बिजनेस हेड सिद्धार्थ सिंघल ने कहा, ‘जीएसटी की कम हुई दरों ने ग्राहकों को उच्च-कवरेज वाली योजनाओं की ओर प्रेरित किया है। उच्च-कवरेज वाली योजनाओं की मांग लगभग दोगुनी हो गई है। असीमित बीमा राशि वाली योजनाओं को भी तेजी से अपनाया जा रहा है। जीएसटी दरों में संशोधन के साथ-साथ बढ़ती चिकित्सा लागतों ने उच्च और अधिक व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज की ओर बदलाव को तेज करने में बड़ी भूमिका निभाई है।’
केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में खुदरा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के लिए जीएसटी दरों को 18 प्रतिशत से घटाकर 0 प्रतिशत कर दिया था। इससे यह अधिक किफायती हो गई थी। परिणामस्वरूप, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की मांग बढ़ गई।
गैलेक्सी हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ जी. श्रीनिवासन ने कहा, ‘लोगों को उच्च बीमा राशि वाली स्वास्थ्य बीमा की जरूरत है। लोग जीएसटी की दरों में कमी के बाद उच्च बीमा राशि देख रहे हैं। दरअसल, उन्हें लगता है कि वे इसे वहन कर सकते हैं। हमेशा 12-14 प्रतिशत की चिकित्सा महंगाई रहती है। इसलिए, स्वास्थ्य बीमा का मूल्य हर साल 12-14 प्रतिशत कम होता रहता है।
फिर भी, सबसे लोकप्रिय स्वास्थ्य बीमा श्रेणियों में से एक 10 लाख रुपये तक की है जिसे लोग खरीदते हैं। हम देख रहे हैं कि लोग अगले स्तर पर जाने और उच्च बीमा राशि के कवरेज की तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं।’
पॉलिसीबाजार के अनुसार 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच की पॉलिसियों की मांग स्थिर बनी हुई है और इसका हिस्सा 61 प्रतिशत से बढ़कर केवल 62 प्रतिशत हुआ है। इस दौरान 10 लाख रुपये से कम की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की हिस्सेदारी जीएसटी की कमी के बाद 26 प्रतिशत से गिरकर 10 प्रतिशत के पूर्ववर्ती स्तर पर पहुंच गई।