जीवन बीमा उद्योग ने दो साल के सुस्त प्रदर्शन के बाद वित्त वर्ष 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए नए बिजनेस प्रीमियम (एनबीपी) में सालाना आधार पर 15.7 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की है। इसके साथ ही, जीवन बीमा उद्योग ने पहली बार एक साल में 4 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। इस शानदार बढ़ोतरी में बीमा योजनाओं पर लगने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को 18 फीसदी से घटाकर शून्य किए जाने का अहम योगदान रहा।
जीवन बीमा परिषद के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में एनबीपी बढ़कर 4.59 लाख करोड़ रुपये हो गया है जो वित्त वर्ष 2025 में 3.97 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 में एनबीपी में सालाना आधार पर 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि वित्त वर्ष 2024 में सिर्फ 2 फीसदी की वृद्धि हुई थी। हालांकि, इससे पहले वित्त वर्ष 2023 में 17 फीसदी की मजबूत वृद्धि देखने को मिली थी। एनबीपी, वह रकम होती है जो बीमा कंपनियों को नए ग्राहकों को पॉलिसी बेचने पर पहली बार मिलती है।
इस साल सरकारी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रीमियम में सालाना आधार पर 14.9 फीसदी की उछाल देखी गई और यह 2.27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, निजी जीवन बीमा कंपनियों ने 16.75 फीसदी की शानदार वृद्धि दर्ज की और उनका प्रीमियम 1.71 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.99 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इस दौरान व्यक्तिगत पॉलिसी के प्रीमियम में सालाना आधार पर 10.8 फीदी की वृद्धि हुई और यह 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, कंपनियों और संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले समूह बिजनेस प्रीमियम में सालाना आधार पर 19.24 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और यह बढ़कर 2.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
सिर्फ मार्च महीने की बात करें तो पूरे उद्योग के एनबीपी में सालाना आधार पर 23.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 75,872.3 करोड़ रुपये हो गया। एलआईसी ने 17.35 फीसदी की वृद्धि (43,310 करोड़ रुपये) दर्ज की जबकि निजी कंपनियों का प्रीमियम लगभग 33 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी के साथ 32,562.1 करोड़ रुपये रहा।
केयरएज रेटिंग्स के सहायक निदेशक (बीएफएसआई) सौरभ भालेराव ने बताया, ‘एलआईसी और निजी बीमा कंपनियों, दोनों ने ही बेहतरीन आंकड़े पेश किए हैं। एलआईसी ने वापस अपनी रफ्तार पकड़ ली है जबकि निजी बीमा कंपनियों की वृद्धि दर और भी अधिक रही है। इस प्रदर्शन के पीछे, नई बीमा योजनाओं की पेशकश, जीएसटी में अनुकूल बदलाव और कम ब्याज दरों वाले माहौल में ग्राहकों का अच्छे रिटर्न के लिए इसमें रुझान बढ़ना प्रमुख कारक हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ साल में नियामकीय बदलाव के कारण जो सुस्ती आई थी, अब वह दौर खत्म हो गया है और बाजार फिर से सामान्य हो गया है।’