अप्रैल में जीवन बीमा कंपनियों की बेची गई नई पॉलिसी का प्रीमियम (एनबीपी) 39 प्रतिशत बढ़कर 30,550.38 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल की समान अवधि में 21,964.2 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि सरकारी, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और निजी जीवन बीमा कंपनियों दोनों के मजबूत प्रदर्शन के कारण हुई।
विश्लेषकों के अनुसार, इस वृद्धि का समर्थन न केवल आधार के कम होने से हुआ बल्कि खुदरा जीवन बीमा पॉलिसी पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी के बाद जारी रफ्तार से भी मिला। जीवन बीमा परिषद के डेटा के अनुसार, एलआईसी का एनबीपी 38 प्रतिशत बढ़कर 18,782 करोड़ रुपये हो गया जबकि निजी जीवन बीमा कंपनियों की प्रीमियम आय 40.88 प्रतिशत बढ़कर 11,768 करोड़ रुपये पहुंच गई।
निजी कारोबार के तहत एनबीपी 19.35 प्रतिशत बढ़कर 9,458.5 करोड़ रुपये हो गया जबकि समूह कारोबार में सालाना 50.23 प्रतिशत की तेजी आई और यह 21,091.88 करोड़ रुपये हो गई।
नुवामा के विश्लेषक का कहना है, ‘टर्म इंश्योरेंस में जीएसटी के कारण उद्योग को मजबूती मिली है। ऐसा लगता है कि इस रफ्तार का कुछ हिस्सा अप्रैल में भी बना रहा, जिससे मार्जिन में लाभ के संकेत मिले।’
निजी बीमाकर्ताओं में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने सालाना एनबीपी में 79.6 फीसदी की तेजी दर्ज की और यह बढ़कर 3,040.96 करोड़ रुपये हो गया। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ने 30.27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 2,531.42 करोड़ रुपये हो गया जबकि आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने 25.61 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 1,296.4 करोड़ रुपये हो गया।
वहीं बजाज लाइफ इंश्योरेंस की नई बेची गई पॉलिसी का प्रीमियम सालाना 30.25 फीसदी बढ़कर 936.99 करोड़ रुपये हो गया जबकि ऐक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने 17.58 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 696.2 करोड़ रुपये हो गया।