कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के बीच गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पारंपरिक ऋणदाताओं की ओर रुख करने के कारण मार्च 2026 में बैंकों से एनबीएफसी को मिलने वाले ऋण में सालाना आधार पर लगभग 26.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह ऋण 20.65 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष की इसी अवधि में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जब बकाया पोर्टफोलियो 16.35 लाख करोड़ रुपये था।
इंडस्ट्री सेग्मेंट में मार्च 2025 तक बैंक ऋण सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ा है।
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और फाइनैंशियल सेक्टर के ग्रुप हेड कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, ‘पहली तिमाही में बॉन्ड जारी करने में उछाल आया था, जिसके बाद यह अपेक्षाकृत कम हो गया। उच्च ब्याज दरों और बॉन्ड बाजार में अस्थिरता के बीच एनबीएफसी बैंक से ऋण लेने का लाभ उठा सकते हैं।’ भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2025 से एनबीएफसी को बैंक ऋणों के लिए जोखिम भार को भी कम कर दिया है, जिसे नवंबर 2023 में बढ़ाया गया था। इससे बैंकों को गैर-बैंकिंग संस्थाओं को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों को बैंक ऋण सालाना आधार पर 15.5 प्रतिशत की वृद्धि होकर 3.23 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधइ में 0.6 प्रतिश सालाना वृद्धि हुई थी। वहीं सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों को दिया गया ऋण 52.5 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 2.29 लाख करोड़ रुपये हो गया।