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लेबर कोड का सीधा असर, प्राइवेट बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों का खर्च बढ़ा

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कर्मचारी लागत बढ़ने से Q3FY26 में ऑपरेटिंग खर्च में इजाफा, पब्लिक सेक्टर बैंक लगभग अप्रभावित

Last Updated- January 19, 2026 | 10:26 AM IST
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केंद्र सरकार की ओर से नवंबर 2025 में लागू किए गए नए लेबर कोड का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। इन नियमों की वजह से प्राइवेट सेक्टर बैंकों और बीमा कंपनियों की कर्मचारी लागत बढ़ गई है, जिससे अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (Q3FY26) में उनका ऑपरेटिंग खर्च बढ़ गया।

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC बैंक ने Q3FY26 में ₹18,770 करोड़ का ऑपरेटिंग खर्च दर्ज किया, जो पिछली तिमाही Q2FY26 में ₹17,110 करोड़ था। बैंक ने बताया कि नए लेबर कोड के चलते इस तिमाही में कर्मचारी लागत में करीब ₹800 करोड़ का अतिरिक्त असर पड़ा है। बैंक ने कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकारों के नियमों और स्पष्टीकरण पर नजर बनाए हुए है और आगे जरूरत के हिसाब से अकाउंटिंग बदलाव करेगा।

इसी तरह ICICI बैंक ने नए लेबर कोड के कारण Q3FY26 में अपने मुनाफे पर ₹145 करोड़ के असर का अनुमान लगाया है। यस बैंक ने ₹155 करोड़, फेडरल बैंक ने ₹20.8 करोड़ और RBL बैंक ने ₹32 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया है।

बीमा कंपनियों पर भी असर

नए लेबर कोड का असर बीमा कंपनियों पर भी पड़ा है। HDFC लाइफ इंश्योरेंस ने कर्मचारी लाभ के लिए ₹106.02 करोड़ का अतिरिक्त खर्च दर्ज किया है। ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने ₹11.04 करोड़ और ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने ₹53.06 करोड़ के अतिरिक्त असर का अनुमान लगाया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक सेक्टर बैंकों की सैलरी स्ट्रक्चर पहले से ही नए नियमों के करीब थी, इसलिए उन्हें किसी बड़े बदलाव या अतिरिक्त प्रावधान की जरूरत नहीं पड़ी।

क्यों बढ़ा खर्च?

नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ाना जरूरी हो गया है। इससे नियोक्ताओं को ग्रेच्युटी, पेंशन और सोशल सिक्योरिटी फंड में ज्यादा योगदान देना होगा, जिससे कुल कर्मचारी लागत बढ़ जाती है।

क्या हैं नए लेबर कोड?

21 नवंबर 2025 को सरकार ने चार लेबर कोड लागू किए हैं। इनमें वेतन संहिता 2019 (The Code on Wages, 2019), औद्योगिक संबंध संहिता 2020 (The Industrial Relations Code, 2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 (The Code on Social Security, 2020), और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 (The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020) शामिल हैं। इन कोड्स के जरिए 29 पुराने श्रम कानूनों को एक साथ जोड़ा गया है। 30 दिसंबर 2025 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इनके ड्राफ्ट नियम और FAQs जारी किए, जिसके बाद कंपनियों ने अपने वित्तीय असर का आकलन किया।

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First Published - January 19, 2026 | 10:26 AM IST

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