वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निपटाए गए खराब बैंक नोटों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। इसका मुख्य कारण नई मशीनें लगाए जाने के कारण ऐसे नोटों के टुकड़े करने की प्रक्रिया (श्रेडिंग) न होना है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के 22.9 अरब नोटों की तुलना में केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में 17 अरब खराब या कटे-फटे नोटों का निपटान किया।
यह गिरावट मुख्य रूप से श्रेडिंग ऐंड ब्रिकेटिंग सिस्टम (एसबीएस) किए जाने के कारण हुई। सूत्रों ने बताया कि ऐसी मशीनों के प्रतिस्थापन और स्थापना कार्य में आमतौर पर 4 से 5 महीने लगते हैं। इस अवधि के दौरान एसबीएस और करेंसी वेरिफिकेशन ऐंड प्रोसेसिंग (सीवीपीएस) मशीनों का संचालन निलंबित रहा।
रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के इश्यू कार्यालयों में बैंक नोट प्रसंस्करण अवसंरचना के उन्नयन का कार्य नई एसबीएस मशीनों की स्थापना के साथ जारी रहा। वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘2025-26 के दौरान खराब बैंक नोटों का निपटान पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा है, जिसका कारण रिजर्व बैंक के इश्यू कार्यालयों में श्रेडिंग ऐंड ब्रिकेटिंग सिस्टम के प्रतिस्थापन से उत्पन्न अस्थायी रुकावटें हैं।’
नई करेंसी वेरिफिकेशन ऐंड प्रोसेसिंग सिस्टम (सीवीपीएस) की खरीद के साथ नकदी प्रसंस्करण की व्यवस्था का विस्तार भी चल रहा है। जहां तक खराब या कटे-फटे नोटों के आदान-प्रदान का सवाल है, रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार सभी बैंक शाखाएं खराब बैंक नोटों को स्वीकार कर सकती हैं और उनके पूर्ण मूल्य के बदले में बदल सकती हैं। बैंकों को अपने ग्राहकों के अलावा अन्य लोगों के कटे फटे नोट भी बदलने चाहिए।