कॉरपोरेट्स और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के अन रेटेड ऋण पर 150 प्रतिशत जोखिम भार लागू करने की सीमा 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह मानक दृष्टिकोण के तहत क्रेडिट जोखिम के लिए बेसल 3 पूंजी प्रभार पर अंतिम निर्देशों के अनुसार किया गया है, जो 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे।
रिजर्व बैंक द्वारा 2023 में जारी मसौदा दिशानिर्देशों में गैर-रेटेड एक्सपोजर पर उच्च जोखिम भार के लिए 200 करोड़ रुपये की निचली सीमा का प्रस्ताव दिया था और पहले की रेटिंग के बाद अन रेटेड हो गए एक्सपोजर के दंडात्मक उपचार के लिए प्रावधान शामिल किए थे। मसौदे में अन रेटेड बैंक एक्सपोजर के लिए सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन ऐक्ट (एससीआरए) आधारित ग्रेडिंग ढांचे के उपयोग और विशेष ऋण के तहत एक अलग ‘कमोडिटीज फाइनैंस’ श्रेणी का भी प्रस्ताव दिया गया था।
रिजर्व बैंक ने उस प्रावधान को भी वापस ले लिया है, जिसमें उन एक्सपोजर के लिए उच्च जोखिम भार की आवश्यकता थी, जो पहले रेटेड थे लेकिन बाद में अन रेटेड हो गए।
बैंक एक्सपोजर के लिए रिजर्व बैंक ने अन रेटेड एक्सपोजर के लिए प्रस्तावित सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट पर आधारित ग्रेडिंग ढांचे को बंद कर दिया है। इसके बजाय दीर्घकालिक एक्सपोजर के लिए 100 प्रतिशत और अल्पकालिक एक्सपोजर के लिए 50 प्रतिशत का समान जोखिम भार निर्धारित किया गया है। भारत में विदेशी बैंक शाखाओं के मामले में जोखिम भार की गणना के लिए मूल बैंक की बाहरी क्रेडिट रेटिंग का उपयोग किया जा सकता है।