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IRDAI के आदेश पर सैट की रोक

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चेयरपर्सन सलूजा को निर्देश दिया गया है कि वह मौजूदा ईसॉप का इस्तेमाल न करे

Last Updated- August 09, 2024 | 10:48 PM IST
IRDAI

प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) ने शुक्रवार को रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की कार्यकारी चेयरपर्सन रश्मि सलूजा और उसकी सहायक केयर हेल्थ के खिलाफ बीमा नियामक आईआरडीएआई के आदेश पर रोक लगा दी। यह मामला एम्पलॉई स्टॉक ऑनरशिप (ईसॉप) के आवंटन से संबंधित है। यह स्थगन अंतिम फैसले तक लागू रहेगा।

हालांकि पंचाट ने सलूजा पर पाबंदी लगाई की कि वह केयर हेल्थ से आवंटित ईसॉप्स का इस्तेमाल न करे और न ही अंतिम फैसले तक अपने शेयर बेचे। सैट ने कहा कि रश्मि सलूजा केयर हेल्थ के 75,69,685 शेयर किसी भी तरह न बेचें और इन शेयरों के मामले में यथास्थिति बनाए रखें। साथ ही, केयर हेल्थ से यह कहा गया कि वह सलूजा को और ईसॉप्स जारी न करे। फर्म को जुर्माने की 50 फीसदी रकम चार हफ्ते के भीतर जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है।

सैट आईआरडीएआई के जुलाई के आदेश के खिलाफ सलूजा और केयर हेल्थ की अपील की सुनवाई कर रहा है। उसने फर्म पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और कंपनी से कहा है कि वह सलूजा को आवंटित 45.32 रुपये के भाव पर आवंटित 76.6 लाख शेयर 30 दिन के भीतर फिर से खरीदे। आदेश में केयर हेल्थ से कहा गया है कि वह सलूजा को दिए शेयर रद्द करे और न लिए गए शेयर विकल्प रदद् कर दे। साथ ही आगे और आवंटन तथा मंजूरी पर भी पाबंदी लगाई गई है।

सलूजा के वकील ने तर्क दिया कि आईआरडीएआई के आदेश से पहले उन्हें न तो नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का मौका दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि केयर की पारिश्रमिक समिति ने सलूजा को होल्डिंग कंपनी के कर्मचारी होने के नाते ईसॉप्स दिए थे और बाद में शेयरधारकों ने भी इसकी मंजूरी दी थी। वकील ने कहा कि रेलिगेयर के कई अधिकारियों को केयर से 2014 व 2020 के बीच ईसॉप्स मिले थे और आईआरडीएआई ने सलूजा पर कोई आरोप नहीं
लगाया था।

आईआरडीएआई के प्रतिनिधि ने दलील दी कि नियामक का आदेश केयर व उसके पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि आईआरडीएआई प्रवर्तक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशकों के इक्विटी लिंक्ड बेनिफिट पर रोक लगाता है क्योंकि इससे हितों का टकराव खड़ा होता है और अत्यधिक जोखिम को प्रोत्साहन मिलता है।

वकील ने तर्क दिया कि आईआरडीएआई ने सलूजा को केयर की तरफ से ईसॉप्स जारी करने से जुड़े आवेदन को पहले ही खारिज कर दिया था और फर्म ने इस निर्देश का उल्लंघन किया। सैट ने जबाव और रीज्वाइंडर के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।

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First Published - August 9, 2024 | 10:29 PM IST

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