ADR Report: देश की क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार 67 में से केवल 36 क्षेत्रीय दलों की ऑडिट रिपोर्ट ही वित्त वर्ष 2024-25 के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जबकि 31 पार्टियों ने अंतिम तिथि के 207 दिन बाद तक भी अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की।
एडीआर की इस रिपोर्ट के मुताबिक 36 क्षेत्रीय दलों की कुल आय वित्त वर्ष 2024-25 में 1192.94 करोड़ रुपये रही, इससे पहले वाले वित्त वर्ष में आय 2463.17 करोड़ रुपये थी। इस तरह की वर्ष 2024-25 में क्षेत्रीय दलों की आय में 51.57 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रीय दलों में वित्त वर्ष 2024-25 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने सबसे अधिक 228.31 करोड़ रुपये की आय घोषित की, जो कुल आय का 19.14 प्रतिशत है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (AITC) की आय 219.35 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस की आय 140.38 करोड़ रुपये रही। शीर्ष पांच पार्टियों की कुल आय 821.86 करोड़ रुपये रही, जो सभी 36 पार्टियों की कुल आय का करीब 69 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 19 पार्टियों की आय में बढ़ोतरी हुई, जबकि 17 पार्टियों की आय घटी। AIADMK की आय में सबसे अधिक 39.24 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और जनसेना पार्टी का स्थान रहा।
ADR के अनुसार 21 क्षेत्रीय दलों ने अपनी आय से अधिक खर्च किया। 36 क्षेत्रीय दलों का कुल घोषित खर्च 1433.06 करोड़ रुपये रहा। सबसे अधिक खर्च करने वाली शीर्ष 5 पार्टियों में वाईएसआर-कांग्रेस पहले स्थान पर रही, जिसने 340.20 करोड़ रुपये या कुल खर्च का 23.73 प्रतिशत व्यय किया, वाईएसआर-कांग्रेस की आय खर्च से काफी कम 140.38 करोड़ रुपये रही। इसके बाद बीजद ने 288.44 करोड़ रुपये (20.12 प्रतिशत), तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने 227.59 करोड़ रुपये (15.88 प्रतिशत), बीआरएस ने 180.59 करोड़ रुपये (12.60 प्रतिशत) और समाजवादी पार्टी (SP) ने 74.74 करोड़ रुपये (5.21 प्रतिशत) खर्च किए। रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक दलों के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा प्रशासनिक एवं सामान्य खर्च तथा चुनाव पर खर्च हुआ।
क्षेत्रीय दलों की कुल आय में सबसे बड़ा हिस्सा स्वैच्छिक चंदे का रहा। 36 पार्टियों ने 702.36 करोड़ रुपये यानी कुल आय का 58.87 प्रतिशत चंदे के रूप में जुटाया। क्षेत्रीय पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस ने सबसे अधिक दान/योगदान की घोषणा की, जो 184.08 करोड़ रुपये रही। इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने 140.05 करोड़ रुपये, तेलुगु देशम पार्टी ने 85.20 करोड़ रुपये, AIADMK ने 66.3074 करोड़ रुपये, बीजद ने 60.00 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 58.447 करोड़ रुपये की राशि घोषित की। क्षेत्रीय दलों को 277.21 करोड़ रुपये की आय ब्याज से प्राप्त हुई, जो कुल आय का 23.24 प्रतिशत है।
एडीआर की इस रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय ऑडिट रिपोर्ट जमा करने में देरी कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में शामिल 36 पार्टियों में से 21 पार्टियों की ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग (ECI) की वेबसाइट पर अंतिम जमा करने की तिथि के 2 से 96 दिनों की देरी के बाद उपलब्ध हुई। वहीं, 31 क्षेत्रीय दलों की ऑडिट रिपोर्ट इस रिपोर्ट की तैयारी के समय तक ECI की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी, जबकि जमा करने की अंतिम तिथि से 207 दिन बीत चुके थे। इन 31 क्षेत्रीय दलों में DMK, शिवसेना, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, लोक जनशक्ति पार्टी और टिपरा मोथा पार्टी जैसी कई प्रमुख पार्टियां शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर 2013 को अपने फैसले में कहा था कि उम्मीदवार के हलफनामे का कोई भी हिस्सा खाली नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इसी तर्ज पर ADR ने सिफारिश की है कि चुनाव आयोग ऐसे नियम लागू करे, जिनके तहत 20,000 रुपये से अधिक के चंदे का विवरण देने वाले राजनीतिक दलों द्वारा जमा किए जाने वाले फॉर्म 24A का कोई भी हिस्सा खाली न छोड़ा जाए। सभी दानदाताओं का पूरा विवरण RTI के तहत सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वित्त अधिनियम 2017 के तहत आयकर अधिनियम की धारा 13A में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार पंजीकृत राजनीतिक दलों को तभी कर छूट मिलेगी, जब वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल करेंगे। इसलिए जो पार्टियां समय पर आयकर रिटर्न जमा नहीं करतीं, उनकी आय को कर-मुक्त नहीं माना जाना चाहिए और ऐसी डिफॉल्टर पार्टियों की मान्यता समाप्त की जानी चाहिए। जो राजनीतिक दल ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने में ICAI के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते, उनकी आयकर विभाग द्वारा जांच होनी चाहिए।
सभी राजनीतिक दलों को अपनी वित्तीय जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे राजनीतिक दलों, चुनाव और लोकतंत्र को और मजबूती मिलेगी। ADR ने यह भी कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा हर साल ऑडिट और चंदा रिपोर्ट जमा करने में देरी या चूक पर केवल स्मरण पत्र भेजने के बजाय दंडात्मक और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 13A और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29(C) में स्पष्ट प्रावधान हैं कि वित्तीय विवरण जमा नहीं करने पर राजनीतिक दलों की कर छूट समाप्त की जा सकती है, लेकिन चुनाव आयोग ने इन प्रावधानों को सख्ती से लागू नहीं किया है। ADR के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक हर साल कम से कम 18 राजनीतिक दलों ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जमा करने में चूक की है।