अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर प्रतिबंध की छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है ताकि ‘सबसे कमजोर देशों’ को समुद्र में फंसे रूसी तेल तक अस्थायी पहुंच मिल सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह अमेरिकी फैसला भारत के लिए बड़ी राहत है। अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के आदेश के अनुसार देशों को 17 अप्रैल या उससे पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल को 17 जून तक खरीदने की अनुमति है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘यह विस्तार अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेगा और हम इन देशों के साथ आवश्यकतानुसार विशिष्ट लाइसेंस प्रदान करने के लिए काम करेंगे। यह सामान्य लाइसेंस कच्चे तेल के भौतिक बाजार को स्थिर करने। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि तेल सबसे अधिक ऊर्जा-संवेदनशील देशों तक पहुंचे।’
बेसेंट ने कहा कि 30 दिनों का अस्थायी सामान्य लाइसेंस चीन की रियायती तेल का भंडारण करने की क्षमता को कम करके मौजूदा आपूर्ति को सबसे जरूरतमंद देशों तक पहुंचाने में भी मदद करेगा। इससे पहले दी गई अमेरिकी छूट 16 मई को समाप्त हो गई थी। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने 18 मई को कहा कि अमेरिकी छूट के अभाव में भी भारतीय रिफाइनर रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेंगे।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगी कि हम छूट से पहले और उसके दौरान भी रूस से (कच्चा तेल) खरीदते रहे हैं। हम अभी भी खरीद रहे हैं। तेल कंपनियों के लिए (रूसी तेल) खरीदना व्यावसायिक दृष्टि से उचित होना चाहिए।’ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी छूट ने भारतीय तेल कंपनियों को प्रतिबंधित रूसी कंपनियों से कच्चा तेल खरीदने में सक्षम बनाया है, जिससे ईंधन की उपलब्धता तय हुई है।
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व कॉरर्पोरेट रेटिंग्स के सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने 15 मई को कहा, ‘भुगतान संबंधी बाधाओं और अन्य संबंधित मुद्दों को देखते हुए यदि अमेरिकी छूट का नवीनीकरण नहीं होता है तो भारतीय तेल कंपनियों को रूसी तेल की खरीद कम करनी होगी।’मेरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार भारत ने मई में अब तक प्रतिदिन 18.7 लाख बैरल (बीपीडी) रूसी तेल खरीदा है जो उसके कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत देशों को रोसनेफ्ट और लुकऑयल सहित प्रतिबंधित कंपनियों से रूसी तेल खरीदने की अनुमति है। इन कंपनियों पर अमेरिका ने पहले प्रतिबंध लगा रखा था। अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले ये दोनों तेल उत्पादक भारत की कुल रूसी तेल खरीद का लगभग 60 प्रतिशत आपूर्ति करते थे।