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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में और बढ़ेगी थलसेना की ताकत, 30 जून से संभालेंगे कमान 

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सरकार ने शनिवार को मौजूदा उप थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सेठ को अगला थलसेना प्रमुख बनाए जाने का ऐलान किया

Last Updated- June 14, 2026 | 11:40 PM IST
Lieutenant General Dhiraj Seth
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ | फोटो: विकिमीडिया

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ आगामी 30 जून को नए थलसेना प्रमुख की कमान संभाल लेंगे। माना जा रहा है कि नए थलसेनाध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान भी थलसेना की क्षमता बढ़ाने और आधुनिकीकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों एवं सुधारों की गति बरकरार रहेगी। सेठ ने इन दोनों ही मोर्चों पर थलसेना के लिए एक दीर्घ अवधि की कार्य योजना तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। सरकार ने शनिवार को मौजूदा उप थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सेठ को अगला थलसेना प्रमुख बनाए जाने का ऐलान किया।

सेठ 30 जून को अपना पद संभालेंगे। मौजूदा थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन सेवानिवृत्त होंगे। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ 1 अप्रैल, 2026 से उप सेना प्रमुख के तौर पर काम कर रहे हैं। उनकी थलसेना प्रमुख के तौर पर नियुक्ति ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल से कुछ अधिक समय बाद हुई है।  पाकिस्तान के साथ 7 से 10 मई के बीच हुए सैन्य संघर्ष में सेना ने गाइडेड आर्टिलरी और मानव रहित प्रणाली का इस्तेमाल किया था जिसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक की मदद ली गई थी। ये हमले आतंकवादी ठिकानों और पाकिस्तानी सेना के नियमित ठिकानों दोनों पर किए गए थे।

सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि देश के रक्षा क्षेत्र में बदलाव तेज करना लेफ्टिनेंट जनरल सेठ के लिए थलसेना प्रमुख बनने के बाद एक मुख्य लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा,‘जब भारतीय थलसेना अपने आधुनिकीकरण के सफर के एक अहम दौर में प्रवेश कर रही है तब लेफ्टिनेंट जनरल सेठ जनरल द्विवेदी की जगह ले रहे हैं। जनरल द्विवेदी ने बड़े सुधारों को आगे बढ़ाने में शानदार गति दी है। इस चल रहे बदलाव के मुख्य सूत्रधारों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल सेठ थलसेना को ऐसे भविष्य की ओर ले जाने के लिए अपने सधे नेतृत्व का इस्तेमाल करेंगे जो बेहतर तालमेल, उपकरणों और क्षमताओं में आत्मनिर्भरता और से तय होगा।’

उनकी नियुक्ति की घोषणा से जुड़े एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि लेफ्टिनेंट जनरल सेठ का लगभग चार दशक का करियर ‘ऑपरेशनल, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों’ में फैला रहा है और उन्होंने थलसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने और इसके दीर्घकालिक बदलाव को गति देने में ‘महत्त्वपूर्ण’ योगदान दिया है।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने थलसेना की क्षमता बढ़ाने और उसकी आधुनिकीकरण की कोशिशों कितना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है यह बात भागीदारी, रणनीतिक योजना और क्षमता विकास निदेशालय में उनकी अहम पदों पर नियुक्तियों से साबित होती है। इन पदों में मैकेनाइज्ड फोर्सेज के लिए कर्नल (क्षमता विकास), ब्रिगेडियर (पर्सपेक्टिव प्लान और अधिग्रहण) और अतिरिक्त महानिदेशक (क्षमता विकास) शामिल हैं।

उन्होंने सेना के भविष्य से जुड़ी दीर्घकालिक योजना और आधुनिकीकरण योजना को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाई है। सेवा विशिष्ट भविष्य से जुड़ी दीर्घकालिक योजना को दीर्घकालिक एकीकृत भविष्य योजना में शामिल किया जाता है। यह प्लान 15 साल का होता है और इसे तीन पांच-साल के ‘सर्विसेज कैपिटल एक्विजिशन प्लान’ (जिन्हें डिफेंस प्लान भी कहा जाता है) में बांटा गया है। ये योजना संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कामकाजी जरूरतों को पूरी करने के लिए सेनाओं द्वारा खरीदे जाने वाले उपकरणों का ब्योरा देते हैं।

रक्षा योजना को आगे दो-साल के रोल-ऑन सालाना खरीद योजना में बांटा जाता है। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल सेठ का नजरिया एक ऐसी विश्व-स्तरीय युद्ध के लिए तैयार सेना बनाने पर केंद्रित है जो बहु-आयामी युद्ध क्षेत्र में दबदबा बनाने में सक्षम हो। उन्होंने कहा,‘उनकी कार्य योजना के केंद्र में मानव संसाधन की तैयारी है यानी यह सुनिश्चित करना कि हमारे अधिकारी और सैनिक मौजूदा और उभरती रक्षा और सुरक्षा चुनौतियों से तेजी और मजबूती से निपटने के लिए सुसज्जित, प्रशिक्षित और सशक्त हों।’

बहु-आयामी अभियानों में सैन्य लक्ष्य हासिल करने के लिए जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, सूचना और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) पहलुओं आयामों में क्षमताओं का एकीकृत इस्तेमाल शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ की थलसेना प्रमुख के तौर पर नियुक्ति सरकार द्वारा सेना के इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) बनाने के लंबे समय से विचाराधीन प्रस्ताव को मंजूरी देने के कुछ महीनों बाद हुई है।

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First Published - June 14, 2026 | 11:40 PM IST

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