बजाज ऑटो ने कहा है कि दिल्ली सरकार को ईवी नीति के मसौदे के तहत राजधानी में सीएनजी से चलने वाले तिपहिया वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के संबंध में ‘दोहरे मापदंड’ नहीं अपनाने चाहिए, बल्कि इसे यात्री कारों, बसों और ट्रकों समेत वाहनों की अन्य सभी श्रेणियों पर भी लागू करना चाहिए।
पुणे की यह कंपनी सीएनजी तिपहिया वाहनों में बाजार की प्रमुख भागीदार है और दिल्ली उसके मुख्य बाजारों में से एक है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रस्तावित प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अगर दिल्ली सरकार ऐसा करती है (सीएनजी तिपहिया पर प्रतिबंध लगाती है), तो उसे कारों, बसों और ट्रकों के लिए भी ऐसा करना चाहिए, क्योंकि इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।’
कंपनी दिल्ली सरकार की उस विवादास्पद मसौदा ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) नीति पर प्रतिक्रिया दे रही थी, जिसे हितधारकों के लिए अप्रैल में जारी किया गया था। इस नीति के तहत सरकार 1 जनवरी, 2027 से सीएनजी के नए ऑटो का पंजीकरण बंद करने और केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया को ही अनुमति देने की योजना बना रही है।
इस नीति में इलेक्ट्रिक तिपहिया खरीदने वालों को पहले वर्ष में 50,000 रुपये, दूसरे में 40,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा पुराने सीएनजी वाहनों की स्क्रैपिंग (कबाड़ में तब्दील करना) पर 25,000 रुपये का प्रोत्साहन भी मिलेगा। सीएनजी ऑटो के मौजूदा परमिट का भी नवीकरण नहीं किया जाएगा, ताकि उसके मालिक को इलेक्ट्रिक वाहनों पर लाया जा सके।
इस कदम से स्पष्ट रूप से बजाज ऑटो पर असर पड़ेगा, जो देश में सीएनजी तिपहिया वाहन बाजार की प्रमुख कंपनी है। है। दूसरी तरफ तिपहिया वाहन बाजार में उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्धी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है।