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बिहार की लीची पर गर्मी और पश्चिम एशिया संकट की मार, उत्पादन में रिकॉर्ड गिरावट; महंगा पड़ रहा स्वाद

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प्रतिकूल मौसम की मार से बिहार में लीची उत्पादन में रिकॉर्ड गिरावट, किसानों और निर्यातकों पर पड़ी गहरी आ​​र्थिक चोट

Last Updated- June 12, 2026 | 12:24 AM IST
Bihar Litchi
कम पैदावार से लीची के दाम बढ़ गए हैं।

देश के मशहूर फल लीची की मिठास हर साल विदेशी बाजारों तक खूब पहुंचती थी, उसकी चमक इस बार फीकी पड़ गई है। प्रतिकूल मौसम ने बागानों में इसका उत्पादन घटाया, जबकि पश्चिम एशिया संकट ने निर्यात की राह मुश्किल बना दी। ऐसे में लीची उत्पादक राज्यों विशेषकर बिहार के किसानों, कारोबारियों और निर्यातकों को इस सीजन अपेक्षित लाभ नहीं मिलने की आशंका है। कम पैदावार से लीची के दाम बढ़ गए हैं। लीची के सबसे बड़े उत्पादक राज्य बिहार में इस साल जितनी कम लीची कभी पैदा नहीं हुई।

पश्चिम एशिया संकट ने विदेश में बिगाड़ा लीची का स्वाद

पश्चिम एशिया संकट से लीची का निर्यात प्रभावित हो रहा है। फलों का निर्यात करने वाली सुपरप्लम फ्रेशकॉर प्रोविजनल प्राइवेट लिमिटेड में पूर्वी क्षेत्र प्रमुख (खरीद) बसंत झा ने बताया कि हवाई मार्ग से लीची निर्यात के भाड़े में 30 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। सभी खर्चों को मिलाकर विदेशी बाजार में लीची की पहुंच कीमत पहले जो 300 से 320 रुपये थी, वो अब बढ़कर 400 रुपये किलो तक हो गई है।

पश्चिम एशिया के ईरान, कुवैत, कतर, दुबई, यूएई, सउदी अरब जैसे देशों को लीची निर्यात के लिए फ्लाइट भी कम मिल रही हैं। ऐसे में इस साल लीची निर्यात में कमी आ सकती है। झा ने बताया कि उनकी कंपनी हवाई मार्ग के अलावा बीते साल से समुद्र मार्ग से लीची निर्यात पर जोर दे रही है। कनाडा, दुबई व यूरोप को समुद्र मार्ग से इस साल लीची के भेज चुके हैं। इस साल 50 टन से ज्यादा लीची निर्यात करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह पूरा होना मुश्किल लग रहा है।

लीची निर्यातक आलोक केडिया ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट से इस साल लीची निर्यात में 20 से 25 फीसदी गिरावट आ सकती है। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक बिकास दास कहते हैं कि इस साल लीची निर्यात कम हो सकता है। भारतीय लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष और बिहार के लीची किसान बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि बिहार में इस साल निर्यात के लिए लीची की खरीद में कमी आई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में भारत से 457 टन लीची का निर्यात हुआ था। निर्यातकों के मुताबिक इस साल निर्यात घटकर 400 टन से नीचे जा सकता है। कुल निर्यात में पश्चिम एशिया देशों की हिस्सेदारी 50 से 60 टन है। सबसे अधिक निर्यात नेपाल को किया जाता है। बीते 6 साल के दौरान लीची का निर्यात कई गुना बढ़ चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 में भारत से महज 89 टन लीची का निर्यात हुआ था, जो 2025 में बढ़कर 457 टन हो गया।

प्रतिकूल मौसम से लीची की फसल तबाह

प्रतिकूल मौसम की इस साल लीची की फसल पर मार पड़ी है। दास ने बताया कि   प्रतिकूल मौसम के कारण लीची के सबसे बड़े उत्पादक राज्य बिहार के मीनापुर, बोचाहा, रोहुआ जैसे प्रमुख लीची उत्पादक इलाकों में शाही लीची की लगभग पूरी फसल की बरबाद हो गई। बिहार में लीची का सामान्य उत्पादन 3 लाख टन है। इस साल राज्य में 50 से 70 हजार टन ही लीची पैदा होने की संभावना है। दास ने कहा कि दूसरे राज्यों में लीची की फसल सामान्य ही है। बच्चा प्रसाद ने कहा कि इस साल लीची का उत्पादन सामान्य की तुलना में 20 से 25 फीसदी ही रहने की संभावना है। बीते कुछ सालों में बिहार में लीची के उत्पादन में कमी देखने को मिल रही है।

बिहार में लीची का सामान्य उत्पादन 3 लाख टन माना जाता है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह घटकर 1.5 लाख टन से नीचे चला गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों मुताबिक पिछली बार बिहार में 3 लाख टन के करीब लीची का उत्पादन वर्ष 2022-23 में हुआ था। इसके बाद से राज्य में लीची का उत्पादन 1.5 लाख टन से कम हो रहा है। वर्ष 2024-25 में बिहार में 1.35 लाख टन लीची पैदा हुई थी। इस साल बिहार में लीची का उत्पादन सामान्य से काफी कम 50 से 70 हजार टन ही होने का अनुमान है। बिहार के उलट दूसरे राज्यों में लीची अधिक पैदा हो रही है। पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लीची की पैदावार बढ़ रही है।

महंगा पड़ रहा स्वाद

उत्पादन में आई भारी गिरावट ने लीची का स्वाद महंगा कर दिया है। दास ने कहा कि शाही लीची अंतिम समय में 300 रुपये किलो तक बिक गई। सामान्य भाव 150 से 180 रुपये के बीच है, जो पिछले साल 100 रुपये के आसपास था। बच्चा प्रसाद ने कहा कि चाइन किस्म की लीची की फसल आना शुरू हो गई।

इसका इस समय भाव 140 से 160 रुपये किलो है, पिछले साल ये भाव 80 से 100 रुपये किलो थे। दिल्ली के खुदरा बाजारों में इस समय लीची 200 से 250 रुपये किलो बिक रही है। हालांकि दाम ज्यादा होने के बावजूद लीची किसानों की जेब खाली है क्योंकि फसल कम होने से कुल कमाई पिछले साल की तुलना में कम ही है। प्रसाद ने कहा कि इस साल लीची की गुणवत्ता की प्रभावित हुई। जिससे अच्छी गुणवत्ता की लीची को बेहतर दाम मिल रहे हैं, लेकिन खराब गुणवत्ता वाली लीची को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं।

इस बीच, कमजोर फसल से लीची कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है। झा ने कहा कि इस साल हमने बड़ी मात्रा में लीची खरीदने की योजना बनाई थी। जिसे देश-विदेश में भेजा जाना था। लीची का सीजन 20 से 22 दिन का होता है और हमने रोजाना 15 से 20 टन लीची प्रोसेस करने की क्षमता का सेटअप तैयार किया था। लेकिन कमजोर फसल और गुणवत्ता के कारण 8 से 10 टन ही लीची प्रोसेस कर पा रहे हैं। प्रसाद ने कहा कि बिहार में लीची के बड़े खरीदार कम ही आए हैं।

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First Published - June 12, 2026 | 12:24 AM IST

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