facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

बंबई उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों से जुड़े संशोधित IT नियमों को असंवैधानिक करार दिया

Advertisement

इस फैसले के साथ, उच्च न्यायालय ने हास्य कलाकार कुणाल कामरा और अन्य द्वारा नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया।

Last Updated- September 21, 2024 | 8:00 AM IST
The constitution gave direction to the country

बंबई उच्च न्यायालय ने सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का पता लगाने का प्रावधान करने वाले संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों को शुक्रवार को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया। जनवरी में एक खंड पीठ ने संशोधित आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर खंडित निर्णय दिया था, जिसके बाद एक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर के पास इस मामले को भेजा गया था।

न्यायमूर्ति चंदुरकर ने शुक्रवार को कहा कि ये नियम संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। न्यायाधीश ने कहा, ‘मैंने इस मामले पर गहनता से विचार किया है। विवादित नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 19(1)(जी) (व्यवसाय की स्वतंत्रता और अधिकार) का हनन करते हैं।’

उन्होंने कहा कि नियमों में ‘फर्जी, झूठा और भ्रामक’ अभिव्यक्ति किसी परिभाषा के अभाव में ‘अस्पष्ट और इस तरह गलत’ है।

इस फैसले के साथ, उच्च न्यायालय ने हास्य कलाकार कुणाल कामरा और अन्य द्वारा नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। इन नियमों में, सरकार के बारे में फर्जी या झूठी सामग्री की पहचान करने के लिए एक तथ्य जांच इकाई (एफसीयू) स्थापित करने का प्रावधान भी शामिल है।

Advertisement
First Published - September 21, 2024 | 8:00 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement