केंद्र सरकार ने औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के खुदरा पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है और उन्हें चुनिंदा उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन प्राप्त करने का निर्देश दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि थोक खरीदार खुदरा विक्रय केंद्रों से ईंधन खरीदने लगे थे। खुदरा और थोक डीजल के बीच कीमत में प्रति लीटर 40 रुपये का अंतर है।
एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘ये उपाय बड़े और थोक उपभोक्ताओं के लिए हैं जिन्हें मूल्य अंतर का अनुचित लाभ उठाने के लिए खुदरा आउटलेट से डीजल नहीं खरीदना चाहिए। जेरी कैन में बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने और उसकी दोबारा बिक्री के उदाहरण सरकार के संज्ञान में आए हैं। यह आदेश ऐसे खरीदारों/ऑपरेटरों, डीलरों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव करेगा जो डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी में शामिल हैं।’
एक अधिकारी के अनुसार, फिलहाल थोक डीजल बिक्री भारत में कुल डीजल बिक्री की लगभग 8 फीसदी है। पश्चिम एशिया संकट से पहले यह 10 फीसदी थी। खुदरा आउटलेट को निर्देश दिया गया है कि वे प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दें और ईंधन केवल वाहन के टैंक या पेसो द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दें। ये उपाय अस्थायी हैं और अधिकतम 90 दिनों तक मान्य रहेंगे।
सरकार ने यह भी कहा कि ये उपाय राशनिंग की कवायद नहीं हैं और देश में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। सरकार ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों के खुदरा पंप पर निजी खुदरा विक्रेताओं की तुलना में अधिक ईंधन मांग की समस्या को भी जाहिर किया। मई में निजी ईंधन खुदरा विक्रेताओं की डीजल बिक्री उनके द्वारा तय की गई ऊंची कीमतों के कारण लगभग 58 फीसदी घट गई। उसी अवधि में सरकारी कंपनियों ने 327 जिलों में डीजल बिक्री में 10 फीसदी की वृद्धि और 80 जिलों में 30 फीसदी अधिक बिक्री दर्ज की।
सरकार ने कहा, ‘ये उपाय नागरिकों को किसी भी तरह प्रभावित नहीं करेंगे, क्योंकि औसत व्यक्ति जो कार या दोपहिया वाहन चलाता है, उसके लिए 200 लीटर की सीमा किसी भी निजी वाहन की आवश्यकता से बहुत अधिक है।’