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Butter Chicken: बटर चिकन की उत्पत्ति का श्रेय किसको? कोर्ट में दो रेस्टोरेंट चेन के बीच कानूनी जंग

Butter chicken battle: जनवरी से चल रहे इस मुकदमे में दोनों रेस्टोरेंट चेन - मोती महल और दरियागंज अपनी-अपनी दुकानों को बटर चिकन के असली जन्मदाता होने का दावा कर रहे हैं।

Last Updated- May 17, 2024 | 4:18 PM IST
Butter Chicken- बटर चिकन

दिल्ली हाई कोर्ट में मशहूर बटर चिकन की असली उत्पत्ति को लेकर दो रेस्टोरेंट चेन के बीच कानूनी लड़ाई और तीखी हो गई है। अब सामने आए नई तस्वीरों और वीडियो सबूतों ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है। जनवरी से चल रहे इस मुकदमे में दोनों रेस्टोरेंट चेन – मोती महल और दरियागंज अपनी-अपनी दुकानों को बटर चिकन के असली जन्मदाता होने का दावा कर रहे हैं। ये लड़ाई सोशल मीडिया, फूड क्रिटिक्स, अखबारों और दुनियाभर के टीवी चैनलों तक में चर्चा का विषय बन गई है।

मोती महल ने की 240,000 डॉलर हर्जाने की मांग

मोती महल का कहना है कि उनके संस्थापक कुंदन लाल गुजराल ने 1930 के दशक में पेशावर (अब पाकिस्तान में) स्थित अपने रेस्टोरेंट में सबसे पहले बटर चिकन बनाया था। बाद में वो दिल्ली आ गए। मोती महल ने मांग की है कि उन्हें ही असली निर्माता माना जाए और उनके प्रतिद्वंदी दरियागंज को उनके दावे वापस लेने चाहिए साथ ही उन्हें 240,000 डॉलर हर्जाना भी देना चाहिए।

दरियागंज ने अपने 642 पन्नों के जवाब में मोती महल की कहानी को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि ये कहानी सच नहीं है और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश है। दरियागंज का दावा है कि उनके संस्थापक परिवार के सदस्य कुंदन लाल जग्गी ने असली बटर चिकन बनाया था। वो दिल्ली के अपने रेस्टोरेंट में किचन का काम संभालते थे, जबकि उनके दोस्त और बिजनेस पार्टनर गुजराल सिर्फ मार्केटिंग देखते थे। दोनों की ही 1997 और 2018 में मृत्यु हो चुकी है।

दरियागंज ने भी पेश किए कई सबूत

दरियागंज ने जज को दिखाने के लिए कई सबूत भी पेश किए हैं, जिनमें 1930 के दशक की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर है जिसमें पेशावर में दोनों दोस्त साथ दिख रहे हैं, 1949 का पार्टनरशिप एग्रीमेंट, दिल्ली आने के बाद जग्गी का बिजनेस कार्ड और 2017 में बटर चिकन की उत्पत्ति के बारे में बात करते हुए उनका वीडियो शामिल है।

दरियागंज का कहना है कि दोस्त होने के नाते दोनों पार्टनर ये दावा कर सकते हैं कि उनके पूर्वजों ने ये डिश बनाई थी। वो इस लड़ाई को सिर्फ “दो बिजनेसों के बीच की होड़” बताते हैं।

मोती महल ने इस मामले पर कोई कॉमेंट करने से इनकार कर दिया है। जज इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को करेंगे। इस कानूनी लड़ाई का मुख्य मुद्दा ये है कि असली बटर चिकन सबसे पहले कहां, कब और किसने बनाया था – क्या गुजराल ने पेशावर में बनाया था, जग्गी ने नई दिल्ली में बनाया था, या फिर दोनों को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए।

बटर चिकन सबसे बेहतरीन व्यंजनों में दुनिया में 43वें नंबर पर

ब्रांड विशेषज्ञों का कहना है कि बटर चिकन को दुनिया के “सबसे बेहतरीन व्यंजनों” की लिस्ट में TasteAtlas द्वारा 43वां स्थान दिया गया है और इसको किसने बनाया, इस पर विवाद के व्यावसायिक फायदे भी हो सकते हैं।

इमेज गुरु और भारतीय पीआर फर्म परफेक्ट रिलेशन्स के को-फाउंडर दिलीप चेरियन ने कहा, “डिश का आविष्कारक होने का दुनियाभर में और ग्राहकों को आकर्षित करने के मामले में बहुत बड़ा फायदा होता है। आप ज्यादा दाम लेने के भी हकदार होते हैं।”

दोनों रेस्टोरेंट में कितनी है बटर चिकन की कीमत?

मोती महल फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता है और दुनियाभर में इसके 100 से ज्यादा आउटलेट हैं। दिल्ली में मोती महल की बटर चिकन की कीमत 667 रुपये से शुरू होती है, जबकि न्यूयॉर्क में इसकी कीमत 1917 रुपये है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू उन मशहूर हस्तियों में शामिल हैं जिन्होंने दिल्ली में मोती महल के मुख्य आउटलेट पर खाना खाया है।

वहीं दरियागंज की शुरुआत 2019 में हुई थी और उनकी बटर चिकन की कीमत 625 रुपये है। उनके 10 आउटलेट हैं, ज्यादातर दिल्ली में ही, और उनकी योजना दूसरे भारतीय शहरों और बैंकॉक में भी रेस्टोरेंट खोलने की है।

2752 पन्नों के अपने मुकदमे में मोती महल ने दरियागंज पर अपने रेस्टोरेंट के अंदरूनी हिस्से के “डिजाइन और सजावट” की नकल करने का भी आरोप लगाया था। दरियागंज ने जज को दिखाने के लिए अपने रेस्टोरेंट के अंदरूनी हिस्से की तस्वीरें पेश की हैं और दावा किया है कि असल में मोती महल ने उनके “फर्श की टाइलों के डिजाइन” की नकल की है। जज अब इन तस्वीरों का रिव्यू करेंगे। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published - May 17, 2024 | 4:18 PM IST

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