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ECLGS 5.0 को कैबिनेट की मंजूरी: MSME और एविएशन सेक्टर को ₹18,100 करोड़ का राहत पैकेज

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आधिकारिक बयान के अनुसार इस योजना से संबंधित कंपनियों को अपनी गतिविधियां जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी

Last Updated- May 05, 2026 | 10:47 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के पांचवें संस्करण को आज मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), विमान कंपनियों और अन्य कंपनियों को प​श्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती लागतों के बीच कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए 18,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

कोविड महामारी के दौरान मई 2020 में पहली बार शुरू की गई इस योजना से विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन सहित 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण प्रवाह की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ईसीएलजीएस 5.0 वैश्विक चुनौतियों के समय में भारत के व्यवसायों, विशेष कर एमएसएमई क्षेत्र का समर्थन करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मजबूत गारंटी कवरेज के साथ अतिरिक्त ऋण प्रवाह को संभव बनाकर यह पहल विभिन्न क्षेत्रों की मदद करेगी। हमारा ध्यान उद्यमों को सशक्त बनाने, वृद्धि की गति को बनाए रखने और आजीविका की सुरक्षा पर केंद्रित है।’

आधिकारिक बयान के अनुसार इस योजना से संबंधित कंपनियों को अपनी गतिविधियां जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार ने कहा कि समय पर नकदी उपलब्ध कराकर यह योजना कारोबार को स्थिर रखने और रोजगार बनाए रखने में मदद करेगी। इससे देश के उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता बनी रहेगी। 

यह योजना बैंकों को सरकार समर्थित गारंटी प्रदान करके प​श्चिम एशिया संकट से प्रभावित व्यवसायों को अधिक ऋण देने की अनुमति देती है। यदि उधारकर्ता भुगतान में चूक करते हैं तो नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी के माध्यम से सरकार एमएसएमई के लिए 100 फीसदी और बड़ी फर्मों व विमानन कंपनियों के मामले में 90 फीसदी नुकसान को कवर करेगी। इससे ऋणदाताओं का जोखिम कम होगा और व्यवसायों की नकदी प्रवाह की समस्या दूर होगी।

कंपनियां वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में उपयोग की गई अपनी उच्चतम कार्यशील पूंजी का 20 फीसदी तक, 100 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के साथ अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकते हैं। विमानन कंपनियां आवश्यकता का 100 फीसदी तक, प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये की सीमा के साथ अतिरिक्त कर्ज ले सकती हैं।

अधिकतर कंपनियों को इस तरह का कर्ज 5 साल के लिए मिलेगा जिसमें 1 साल मॉरेटोरियम है। विमान कंपनियों को 7 साल का समय मिलेगा, जिसमें 2 साल का मॉरेटोरियम होगा यानी इस दौरान कर्ज का भुगतान नहीं करना होगा। सरकारी गारंटी ऋण की पूरी अवधि के लिए मान्य रहेगी। यह योजना नैशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा अधिसूचना की तारीख से 31 मार्च, 2027 तक स्वीकृत ऋणों पर लागू होती है।

सरकार का यह कदम फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) द्वारा नागर ​विमानन मंत्रालय को एक पत्र लिखने के लगभग एक सप्ताह बाद आया है, जिसमें गंभीर संकट की चेतावनी दी गई थी। एफआईए ने कहा, ‘भारत में विमानन उद्योग अत्यधिक दबाव में है और बंद होने या अपने परिचालन को बंद करने की कगार पर है।’ इसमें कहा गया था कि विमानन क्षेत्र की स्थिति प​श्चिम एशिया युद्ध और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में अत्यधिक वृद्धि से और खराब हो गई है। एफआईए ने कहा कि अप्रैल 2026 में परिचालन पूरी तरह से अव्यवहार्य हो गया है और विमानन क्षेत्र के लिए काफी नुकसान हुआ है।

पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमान कंपनियों के लिए बंद है वहीं प​श्चिम एशिया संघर्ष ने प्रमुख मार्गों के बीच उनके अंतरराष्ट्रीय परिचालन को और भी संकुचित कर दिया है जिससे लंबे मार्ग और प्रति उड़ान ईंधन की खपत में काफी वृद्धि हुई है।

विमानन उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि सरकार के कदम से विमान कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति को कुछ राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस कदम से विशेष रूप से स्पाइसजेट जैसी वित्तीय रूप से कमजोर विमान कंपनियों को मदद मिलेगी।

उद्योग के एक कार्या​धिकारी ने कहा, ‘विमानन कंपनियों को बड़ी राहत तेल मार्केटिंग कंपनियों के बढ़ते क्रैक स्प्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने से होगा, जो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों से भी अधिक बढ़ गया है। क्रैक स्प्रेड वह मार्जिन है जो तेल कंपनियां कच्चे तेल को एटीएफ जैसे पेट्रोलियम उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए वसूलती हैं।

इसके अलावा विमान कंपनियां अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पर अधिक एटीएफ खर्च कर रही हैं। इसने भारतीय विमान कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में एटीएफ आम तौर पर उनकी कुल परिचालन लागत का लगभग 40 फीसदी होता है जो अब लगभग 50 से 60 फीसदी हो गया है।

इन वजहों ने भारतीय विमान कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करने पर मजबूर होना पड़ा। विमानन विश्लेषण फर्म सिरम द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अनुसार एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पिछले साल मई में 959 साप्ताहिक उड़ानों का संचालन करती थी तो इस साल मई में घटकर 451 रह गई। एयर इंडिया ने अपनी साप्ताहिक उड़ानों में 288 की कटौती कर 881 उड़ान कर दी है।

स्पाइसजेट ने अपने अंतरराष्ट्रीय परिचालन में 60 फीसदी से अधिक की कटौती की है। कंपनी एक साल पहले हर सप्ताह 176 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती थी जो अब घटकर 70 रह गई है। इंडिगो ने भी 150 उड़ानें घटकार 1,687 कर दी हैं।

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First Published - May 5, 2026 | 10:39 PM IST

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