प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने बुधवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के आधुनिकीकरण और राशन दुकानों को समर्थन देने के लिए ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना के विस्तार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह योजना मार्च 2031 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने ‘स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग-इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस’ (सार्थक-पीडीएस) को एक अम्ब्रेला योजना के रूप में मंजूरी दी है। यह योजना दो मौजूदा कार्यक्रमों को एकीकृत करती है—राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्यों के भीतर खाद्यान्न परिवहन और उचित मूल्य की दुकानों के डीलरों के मार्जिन के लिए सहायता, तथा तकनीकी सुधारों पर केंद्रित SMART-PDS योजना। यह योजना 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान लागू रहेगी और इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी के रूप में 25,530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, “राज्य सरकार की एजेंसियों को राज्य के भीतर बड़े FCI (भारतीय खाद्य निगम) गोदामों से विभिन्न जिलों, डिवीजनों और अंततः उचित मूल्य की दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने की लागत वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने इन खर्चों को पूरा करने हेतु वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है।”
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‘सार्थक-पीडीएस’ योजना का मकसद राज्यों के भीतर खाद्यान्न के परिवहन, भंडारण और राशन दुकानदारों को वित्तीय सहायता देना है। इसके साथ ही सरकार पीडीएस व्यवस्था को ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और लोगों के लिए आसान बनाना चाहती है। यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।
सरकार इस योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करेगी। इससे राशन वितरण की निगरानी रियल टाइम में हो सकेगी, शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और सिस्टम में गड़बड़ियां कम होंगी। योजना के तहत राज्यों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे और एकीकृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि पीडीएस व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।