Cabinet Decision: केंद्र सरकार ने देश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से चार प्रमुख नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। बिहार, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में बनने वाली इन प्रोजेक्ट्स से करीब 650 किलोमीटर से ज्यादा सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। सरकार का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और संबंधित राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार में खगड़िया-पूर्णिया सेगमेंट (NH-31 और NH-231) को चार-लेन हाईवे में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी। यह परियोजना बीओटी (टोल) मॉडल पर 3,936.05 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अपग्रेडेशन से खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों में सड़कों की समस्याओं, तीखे मोड़ों और शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ आदि का समाधान होगा। परियोजना के तहत पूर्णिया शहर के लिए 6.729 किलोमीटर लंबा नया बाईपास भी विकसित किया जाएगा।
बयान में कहा गया कि इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा समय घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता तथा वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय संपर्क और सामाजिक-आर्थिक वृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह परियोजना बिहार के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक एवं लॉजिस्टिक केंद्रों के साथ निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी। साथ ही एडवांस गलियारा-5 पीएम गतिशक्ति आर्थिक केंद्रों और 11 लॉजिस्टिक केंद्रों (चार प्रमुख रेलवे स्टेशन, एक हवाई अड्डा, चार राष्ट्रीय राजमार्ग और दो राज्य राजमार्ग) से जुड़कर मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगा जिससे पूरे क्षेत्र में माल तथा यात्री आवागमन तेज होगा।
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कैबिनेट ने मध्य प्रदेश में 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत वाली दो सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी खंड को चौड़ा और एडवांस कर दो-लेन हाईवे में बदला जाएगा। इसके अलावा, देशगांव-जुलवानिया खंड को मौजूदा दो-लेन से चार-लेन सड़क में बदला जाएगा। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 108.64 किलोमीटर है और इन्हें ‘हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल’ के तहत विकसित किया जाएगा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रूढ़ी और देशगांव-जुलवानिया खंड में सुधार से बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों में सड़क की समस्या दूर होगी। परियोजना के तहत खरगोन जिले में 16.20 किलोमीटर लंबा नया बाईपास भी विकसित किया जाएगा।
तेलंगाना में 190.76 किलोमीटर लंबाई वाली दो प्रमुख नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिल गई है। इनकी कुल लागत 7,597.16 करोड़ रुपये है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने NH-63 के आर्मूर–जगतियाल–मंचेरियल खंड को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर और NH-563 के जगतियाल–करीमनगर खंड को बीओटी मॉडल पर चार-लेन में चौड़ा करने को मंजूरी दी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, आर्मूर–जगतियाल–मंचेरियल खंड निजामाबाद, जगतियाल और मंचेरियल जिलों से होकर गुजरता है जहां अंक्सापूर, कोरुतला, जगतियाल, धर्मपुरी, लक्षेट्टीपेट तथा मंचेरियल जैसे क्षेत्रों में घनी आबादी और निर्माण के कारण भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी तरह, जगतियाल–करीमनगर खंड जगतियाल, पोथाराम, गंगाधारा और करीमनगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां यातायात अधिक है।
परियोजनाओं के तहत चार-लेन सड़कें बनाई जाएंगी, जिनमें शहरी क्षेत्रों के लिए बाईपास और ‘ओपन टोलिंग’ व्यवस्था होगी। इससे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सुनिश्चित होगी और निजामाबाद, जगतियाल, मंचेरियल और करीमनगर जिलों में यात्रा सुगमता में सुधार होगा।
परियोजना से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा और सामाजिक-आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके पूरे होने पर आर्मूर तथा मंचेरियल के बीच यात्रा समय में लगभग एक घंटा 30 मिनट तथा जगतियाल और करीमनगर के बीच करीब 45 मिनट की कमी आने की उम्मीद है। इससे यात्रियों और माल परिवहन के लिए सुरक्षित, तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, इस परियोजना से ईंधन खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहन परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक नए तटीय राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी। इसकी कुल परियोजना लागत 8,300.79 करोड़ रुपये है। आधिकारिक बयान के अनुसार, रामेश्वर से पारादीप तक यह नया तटीय राजमार्ग हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर दो पैकेज में बनाया जाएगा, जिसकी कुल लंबाई 160.18 किलोमीटर होगी। यह परियोजना ओडिशा के खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर जाएगी।
बयान में कहा गया कि पुरी–सतपाड़ा और पुरी–कोणार्क मार्गों पर वर्तमान सड़क संरचना कमजोर है जहां लगभग 40 फीसदी हिस्से में ‘रिबन’ विकास और सड़क किनारे स्थानीय यातायात अधिक है। इससे यह मार्ग लंबी दूरी के सुचारू और कुशल आवागमन के लिए उपयुक्त नहीं है। किसी मुख्य सड़क, राजमार्ग, रेलवे लाइन या नहर के किनारे-किनारे लगातार एक लंबी पंक्ति (रिबन की तरह) में घरों, दुकानों या इमारतों के निर्माण को ‘रिबन’ विकास कहा जाता है।
परियोजना के तहत रामेश्वर से कोणार्क (पैकेज-1) तक चार लेन और कोणार्क से पारादीप (पैकेज-2) तक दो लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इससे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सुनिश्चित होगी और संबंधित जिलों में यात्रा सुगमता में सुधार होगा। यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगी और सामाजिक-आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगी।
परियोजना के पूरा होने पर रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा समय में लगभग दो घंटे 30 मिनट की कमी आने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों और माल परिवहन के लिए सुरक्षित, तेज और निर्बाध संपर्क उपलब्ध होगा। इसके अलावा, इससे ईंधन की खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहन परिचालन लागत (वीओसी) में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
(PTI इनपुट के साथ)