केंद्र सरकार ने दक्षिण तटीय रेलवे को देश के 18वें रेलवे जोन के रूप में अधिसूचित कर दिया है। केंद्र सरकार ने रेलवे का यह जोन बनाने की घोषणा करीब सात वर्ष पहले 2019 के आम बजट में की थी। इस अधिसूचना के साथ ही रेलवे की बहुचर्चित प्रशासनिक पुनर्गठनों में से एक को गति मिली है।
यह कदम आंध्र प्रदेश की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करता है। केंद्र ने 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के दौरान इस रेलवे जोन की प्रतिबद्धता जताई थी। इस अधिसूचना के साथ ही आंध्र और उसके पड़ोसी राज्य ओडिशा में वर्षों से जारी खींचतान का अंत हो गया। पूर्वी तटीय रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे के हिस्से को अलग कर दक्षिण तटीय रेलवे जोन बना। नए रेलवे जोन का मुख्यालय विशाखापत्तनम में है।
रेलवे मंत्रालय की सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार यह नया रेलवे जोन 1 जून से परिचालन में आ जाएगा। यह परियोजना आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगी और इसकी कुल लंबाई लगभग 3,300 किलोमीटर होगी। यह परियोजना मुख्य तौर पर पूर्वी तटीय रेलवे के जबरदस्त राजस्व देने वाले वाल्टेयर डिवीजन के भविष्य के कारण अटकी हुई थी। वाल्टेयर डिवीजन भारतीय रेलवे के सबसे लाभदायक माल ढुलाई डिवीजनों में से एक है।