दिल्ली-NCR समेत देश के कई बड़े शहरों में गाड़ी चलाना अब और महंगा हो गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलो का इजाफा कर दिया है। पिछले 10 दिनों के भीतर आम जनता को लगा यह तीसरा झटका है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। वहीं, नोएडा और गाजियाबाद में अब इसके लिए लोगों को 89.70 रुपये प्रति किलो चुकाने होंगे।
इस नए बदलाव के बाद अलग-अलग शहरों में CNG की कीमतें बदल गई हैं। गुरुग्राम में अब CNG 86.12 रुपये प्रति किलो मिल रही है, जबकि ग्रेटर नोएडा में यह रेट 89.70 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसके अलावा, अजमेर में नई कीमत 90.44 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की लागत लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने 15 मई से बढ़ी हुई कीमतों का असर धीरे-धीरे आम लोगों पर डालना शुरू किया था। आपको बता दें कि तेल कंपनियों ने सबसे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपये बढ़ाए थे, जिसके ठीक बाद 18 मई को फिर से 1 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
वैश्विक स्तर पर देखें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है, क्योंकि दुनिया का एक-तिहाई तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस वजह से भारत में घरेलू स्तर पर पुरानी कीमतों को बनाए रखना तेल कंपनियों के लिए नामुमकिन हो गया था।
इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी बड़ी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीद रही थीं, जिससे उन्हें हर दिन 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। तेल कंपनियों ने सरकार से राहत की मांग भी की थी, लेकिन महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार अब तक किसी बड़े बदलाव से बच रही थी।
CNG के महंगे होने का सीधा और सबसे बड़ा असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) पर पड़ने वाला है। आज के समय में ऑटो, कैब और बसों का एक बहुत बड़ा हिस्सा CNG पर चलता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टर्स इस बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे, जिससे सफर करना महंगा हो जाएगा। यह स्थिति आगे चलकर खुदरा महंगाई को और बढ़ा सकती है।