कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का उदय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्था के खिलाफ एक व्यंग्य है, जिसकी शुरुआत एक प्रतिष्ठित लोक सेवक के कथित बयान से हुई। सही मायने में यह युवाओं की हताशा को दर्शाता है या नहीं, यह कहना जल्दबाजी होगी। भारत और विदेश, दोनों जगह युवाओं के लिए रोजगार और आर्थिक अनिश्चितता जैसी चिंता उनके विचारों को आकार दे रही हैं। भारत में युव बेरोजगारी दर 2020 में 24.5 फीसदी थी जो 2023 में घटकर 15.4 फीसदी रह गई।
मगर 2025 में यह फिर से बढ़कर 17.7 फीसदी हो गई। इस दौरान रोजगार से बाहर, शिक्षा या प्रशिक्षण प्राप्त कर निकले युवाओं का हिस्सा भी बढ़ गया, जो श्रम बाजार के निरंतर दबावों की ओर इशारा करता है। दुनिया भर के कई युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों में भी इसी तरह के पैटर्न दिखाई देते हैं, जहां आर्थिक तनाव एक महत्त्वपूर्ण पृष्ठभूमि का काम करता है।
स्पेन का इंडिग्नाडोस 46.2 फीसदी युवा बेरोजगारी के बीच उभरा था। इसी तरह ट्यूनीशिया में 42.3 फीसदी युवा बेरोगारी दर होने के बाद अरब स्प्रिंग सामने आया और श्रीलंका का अरागलाया आंदोलन भी उसी समय हुआ जब युवा बेरोजगारी दर 30 फीसदी थी।
हालांकि नेपाल में 2025 में जेनज़ी का विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया प्रतिबंध से उपजी सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक हताशा से प्रेरित थे। उस समय नेपाल में युवा बेरोजगारी 20.4 फीसदी थी। ये उदाहरण बताते हैं कि श्रम बाजार के दबाव और अवसर को लेकर हताशा अक्सर युवा लामबंदी के साथ जुड़ जाती है।