Commercial LPG Price Hike: दिल्ली की गलियों में मिलने वाले कबाब हों या पॉश रेस्टोरेंट्स का लजीज खाना, अब हर स्वाद पर महंगाई की कड़वाहट घुलने वाली है। राजधानी के फूड बिजनेस पर इस वक्त एक तरह के ‘इकोनॉमिक शॉक’ लगा है, जिसने तंदूर की आंच से ज्यादा व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गर्म कर दी हैं। कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में हुई 50 फीसदी की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी ने दिल्ली के खान-पान उद्योग को हिलाकर रख दिया है।
इस अचानक आए आर्थिक बोझ के कारण अब दिल्ली के खान-पान उद्योग ने चेतावनी दी है कि वे जल्द ही अपने मेन्यू कार्ड के रेट बढ़ा सकते हैं। अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर छंटनी और छोटे कारोबारों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में एक बार में 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पिछले तीन महीनों में यह लगातार तीसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष की वजह से दुनियाभर के ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के मानद कोषाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने PTI से इस स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि रेस्टोरेंट उद्योग पहले से ही सप्लाई की दिक्कतों और बढ़ती लागत से जूझ रहा था, ऊपर से इस भारी इजाफे ने कमर तोड़ दी है।
मनप्रीत सिंह ने बताया कि बाजार में गैस सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है, जिसकी वजह से कई जगह कालाबाजारी बढ़ने लगी है। पहले जो सिलेंडर डिस्काउंट के बाद 1,300 से 1,600 रुपये में मिल जाते थे, अब उनकी कीमतें काफी बढ़ गई हैं। खुले बाजार में एक सिलेंडर के लिए 3,000 से 4,000 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
एक मीडियम साइज रेस्टोरेंट हर दिन करीब 2 से 5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है, ऐसे में उसका रोज का खर्च हजारों रुपये बढ़ गया है। छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट्स के लिए अब कारोबार चलाना और खुद को बचाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
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लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब रेस्टोरेंट एसोसिएशन अपने सदस्यों को स्थायी विकल्प अपनाने की सलाह दे रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि LPG पर निर्भरता कम करके इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन की तरफ जाना ही फिलहाल सबसे बेहतर रास्ता है।
जानकार भी मानते हैं कि लंबे समय में PNG ज्यादा सस्ता और किफायती साबित हो सकता है। वहीं, कुछ दुकानदार खर्च कम करने के लिए कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन इसकी भी अपनी दिक्कतें हैं। कोयले का इस्तेमाल ज्यादातर सिर्फ तंदूर में ही किया जा सकता है। इसके अलावा, कोयले पर खाना गैस की तुलना में ज्यादा समय में पकता है, इसलिए व्यस्त समय में यह रेस्टोरेंट्स के लिए ज्यादा कारगर विकल्प नहीं माना जा रहा।
दिल्ली के मशहूर खान मार्केट में मौजूद ‘ममागोटो’ के मालिक कबीर सूरी ने भी इस हालात को रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर बढ़ता हुआ बड़ा आर्थिक बोझ बताया है। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतें करीब तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं। सिर्फ गैस ही नहीं, ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी काफी बढ़ गया है। अब कच्चा माल मंगाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में रेस्टोरेंट्स के लिए मेन्यू की कीमतें बढ़ाना लगभग मजबूरी बन गया है। इसका असर छोटे ढाबों से लेकर बड़े फूड चेन तक, हर तरह के कारोबार पर अलग-अलग तरीके से दिखाई दे रहा है।
इस महंगाई का सबसे ज्यादा असर छोटे वेंडरों और रेहड़ी-पटरी वालों पर पड़ा है, जो पहले से ही बहुत कम मुनाफे में काम करते हैं। साकेत इलाके में दुकान चलाने वाले एक वेंडर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपना कारोबार बढ़ाया था। रेहड़ी से काम करने के बजाय उन्होंने किराए पर दुकान ली, ताकि परिवार की कमाई बेहतर हो सके। लेकिन अब बढ़ते खर्चों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहे, इसलिए उन्हें मजबूरी में ब्लैक मार्केट से ज्यादा कीमत देकर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो दुकान चलाना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है।
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में भी वेंडरों की हालत कुछ अलग नहीं है। कई दुकानदारों का कहना है कि जब कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई खत्म हो जाती है, तो काम चलाने के लिए उन्हें घर में इस्तेमाल होने वाले डोमेस्टिक सिलेंडर का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि नियमों के हिसाब से यह गलत है, लेकिन रोजी-रोटी बचाने के लिए वे ऐसा करने को मजबूर हैं। इस समय कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 3,371.5 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर बनी हुई है।
अगर पिछले तीन महीनों का हिसाब देखें, तो 1 मार्च को 114.5 रुपये और 1 अप्रैल को 195.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। यानी सिर्फ तीन महीनों में कमर्शियल सिलेंडर करीब 1,303 रुपये महंगा हो चुका है। इसका सीधा असर राजधानी के फूड बिजनेस पर पड़ रहा है और कई छोटे कारोबार अब गंभीर संकट में पहुंच गए हैं।
(PTI के इनपुट के साथ)