ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की आग से भारतीय खाद्य एवं आतिथ्य उद्योग अभी भी झुलस रहा है। यह क्षेत्र पहले से ही रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत से जूझ रहा था और अब फरवरी से लगातार तीसरी बार वाणिज्यिक (कमर्शियल) सिलिंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी ने रेस्तरां को या तो कीमतें बढ़ाने या मुनाफे में गिरावट का सामना करने के लिए विवश कर दिया है।
सरकार ने 1 मई को वाणिज्यिक सिलिंडरों की कीमत में 993 रुपये की भारी भरकम बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले 1 मार्च और 1 अप्रैल को क्रमशः 114.50 रुपये और 195.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अब दाम में ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के सभी हिस्सों में वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत 3,000 रुपये से अधिक हो गई है। नैशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के अध्यक्ष सागर दरयानी के मुताबिक उद्योग पहले से ही कम मांग से जूझ रहा है और गर्मी में भारी छूट के कारण खाद्य वितरण व्यवसाय में कमीशन और लागत काफी बढ़ गई है।
दरयानी ने कहा,‘ईंधन की लागत का अतिरिक्त बोझ मुनाफे में सेंध लगाएगा।’ लगातार मूल्य वृद्धि पर उनका कहना है कि एक बार कीमतें बढ़ जाने पर वे कम नहीं होती हैं। उन्होंने आगे कहा,‘अभी तक भोजन पर आने वाली औसत लागत में 10 फीसदी हिस्सा एलपीजी का होता था जो अब बढ़कर 12-15 फीसदी हो जाएगा।’
राष्ट्रीय राजधानी में हालात पेचीदा हो गए हैं। कारोबारियों को मुनाफा और ग्राहकों को पेश की जाने वाली सेवाओं के बीच किसी एक में कटौती पर विवश होना पड़ा है। दिल्ली के करोल बाग स्थित एक ढाबे के मालिक गुलशन शर्मा कहते हैं,‘कारोबार चलाना है तो दाम बढ़ाने ही होंगे। हम समझते हैं कि इससे नियमित ग्राहकों पर असर पड़ेगा मगर हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। सभी व्यंजनों की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।’ उन्होंने आस-पास के अन्य ढाबों की ओर इशारा करते हुए कहा कहा कि यह उन सभी का सामूहिक निर्णय है। एनआरएआई के उपाध्यक्ष और मैसिव रेस्टोरेंट्स के संस्थापक जोरावर कालरा कहते हैं कि उद्योग में मुनाफा कमाने की गुंजाइश पहले से ही कम थी और अब बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर ही डाला जाएगा।
एनआरएआई के उपाध्यक्ष और मैसिव रेस्टोरेंट्स के संस्थापक जोरावर कालरा ने कहा, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से कीमत बढ़ाने का समर्थन नहीं करता हूं मगर अब जब हम हिसाब लगा रहे हैं तो हमारी लागत काफी बढ़ गई है। अगर कुल कमाई का 5 फीसदी एलपीजी पर खर्च होता था (युद्ध से पहले) तो अब यह दोगुना हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि रेस्तरां में भोजन पर लागत में 4-6 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। हालांकि, मोती महल जैसे पुराने ब्रांड फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी से बच रहे हैं। मोती महल के मालिक और प्रबंध निदेशक विनोद चड्ढा कहते हैं,‘हमारे ब्रांड का एक खास रसूख है। हम तुरंत कीमतें नहीं बढ़ा सकते। हमने फिलहाल यह बोझ स्वयं उठाने का फैसला किया है। मगर यह सिलसिला जारी रहा तो आखिरकार हमें भी कुछ न कुछ करना होगा।’
चेन्नई में एक साधारण डोसा जिसकी कीमत अभी 150 रुपये है, वह बढ़कर 210 रुपये हो सकती है। इसी तरह, पोंगल की कीमत 80 रुपये से बढ़कर 115 रुपये तक पहुंच सकती है। चेन्नई के रेस्तरां मालिकों के मुताबिक खाद्य पदार्थों की कीमतों में 40 फीसदी से अधिक की वृद्धि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। तमिलनाडु सरकार ने पहले ही रेस्तरां, चाय की दुकानों और क्लाउड किचन को व्यावसायिक एलपीजी से इंडक्शन या इलेक्ट्रिक स्टोव का इस्तेमाल करने के लिए 2 रुपये प्रति यूनिट बिजली सब्सिडी देने की घोषणा कर दी है। चेन्नई होटल एसोसिएशन के अनुमानों के मुताबिक शहर के 15 फीसदी रेस्तरां पहले ही इलेक्ट्रिक माध्यमों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
चेन्नई होटल एसोसिएशन के आर राजकुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया,‘लगभग 15 फीसदी रेस्तरां इलेक्ट्रिक चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि कुछ वापस लकड़ी के चूल्हे पर खाना पका रहे हैं। रसोई गैस की कीमतों में 60 फीसदी बढ़ोतरी के कारण हमें खाद्य पदार्थों की कीमतों में 40 फीसदी का इजाफा होने का डर सता रहा है।’
ओडिशा के होटल और रेस्तरां मालिकों का कहना है कि वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आतिथ्य क्षेत्र पहले से ही कच्चे माल, बिजली, श्रम और परिवहन की बढ़ती लागत से जूझ रहा है। होटल मीरिडियन के प्रबंध निदेशक ययाति दास ने कहा, ‘मौजूदा संकट के बावजूद हमने खाने की कीमत नहीं बढ़ाई थी मगर आने वाले दिनों में हमें कीमतों में 20 से 30 फीसदी का इजाफा करना पड़ सकता है।’
रेस्तरां के मालिक विश्वनाथ जेना ने कहा, ‘हम मार्जिन में कटौती कर और खाने की कीमतों में केवल 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर किसी तरह काम चला रहे थे मगर अब खाने की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी करनी होगी।’