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भारत की समुद्री सुरक्षा होगी और अभेद्य: हेलीकॉप्टर और मिसाइलों के लिए ₹5,083 करोड़ का रक्षा सौदा

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मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इनका शामिल होना भारतीय तटरक्षक बल की समुद्रीय सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता में इजाफा करेगा

Last Updated- March 03, 2026 | 10:11 PM IST
defence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और भारतीय नौसेना के लिए उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर्स (एएलएच) एमके-3 और श्टिल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए 5,083 करोड़ रुपये मूल्य के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस अनुबंध में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से समुद्री भूमिका निभाने वाले छह एएलएच एमके-3 हेलीकॉप्टर और रूस की सरकराी कंपनी जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट से सतह से हवा मे मार करने वानली श्टिल मिसाइलों की खरीद शामिल है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इनका शामिल होना भारतीय तटरक्षक बल की समुद्रीय सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता में इजाफा करेगा।

एएलएच एमके-3 को स्वदेशी स्तर पर डिजाइन और तैयार किया गया है और यह दो इंजन वाला हेलीकॉप्टर है जो समुद्री ऑपरेशंस में विविध भूमिकाएं निभा सकता है। यह उन्नत निगरानी राडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर और आधुनिक संचार प्रणाली से लैस है। हेलीकॉप्टर खोज और बचाव अभियानों में काम कर सकता है, चिकित्सकीय बचाव कर सकता है, तटीय इलाकों में गश्त लगा सकता है और सैन्य बलों को जरूरी मदद तथा परिसंपत्तियों के संरक्षण में काम कर सकता है। यह जहाज से भी संचालित हो सकता है जिससे यह तट रक्षक बलों के लिए खासा उपयोगी हो गया है। यह देश के विस्तारित विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र की रक्षा में भी मददगार हो सकता है।

श्टिल मिसाइल प्रणाली को जहाज से लॉन्च किया जा सकता है और यह हवाई चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इनमें विमानों, हेलीकॉप्टर्स और एंटी शिप मिसाइल शामिल हैं। इसे उन्नत राडारों के साथ जोड़ा गया है ताकि अग्रिम पंक्ति के जहाजों को उच्च जोखिम वाले माहौल में बचाव मुहैया कराया जा सके।

नवीनतम अनुबंध पिछले महीने रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा दी गई स्वीकृतियों की पृष्ठभूमि में आए हैं, जिनका उद्देश्य तटरक्षक बल के बेड़े और निगरानी क्षमता का आधुनिकीकरण करना है। मंत्रालय ने ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत तटरक्षक बल के लिए आठ डॉर्नियर 228 विमान खरीदने हेतु एचएएल के साथ 2,312 करोड़ रुपये का अलग अनुबंध किया।

डॉर्नियर 228 एक हल्का परिवहन और समुद्री गश्ती विमान है, जो कम दूरी में उड़ान भरने और उतरने की क्षमता के लिए जाना जाता ह। समुद्री निगरानी रडार, संचार प्रणाली और मिशन उपकरण से लैस यह विमान तटीय टोही, प्रदूषण प्रतिक्रिया निगरानी, तस्करी विरोधी अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में उपयोगी है। नई तैनाती हवाई निगरानी कवरेज का विस्तार करेगा और भारत के तटरेखा के साथ त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार लाएगा।

इसके अलावा डीएसी ने डॉर्नियर बेड़े के लिए उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड प्रणालियों की ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य रात में निगरानी को बढ़ाना और प्रतिकूल मौसम स्थितियों में पहचान क्षमता में सुधार करना है। उन्नत हेलीकॉप्टर्स, निगरानी विमानों और जहाज-आधारित मिसाइल प्रणालियों की तैनाती का उद्देश्य भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे को मज़बूत करना है, जिससे तटीय गश्त, टोही और बेड़े की वायु-रक्षा क्षमताओं में वृद्धि होगी।

भारत की आयात पर निर्भरता और उसके कच्चे तेल का अधिकांश हिस्सा, जो खाड़ी से आता है, को देखते हुए समुद्री मार्गों और संचार की समुद्री लाइनों की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहती है। उन्नत तटीय निगरानी और तैयारी भारतीय नौसेना की भूमिका को भारतीय महासागर क्षेत्र में सुदृढ़ करेगी, साथ ही महत्वपूर्ण व्यापारिक गलियारों और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा भी करेगी।

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First Published - March 3, 2026 | 10:11 PM IST

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