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Delhi AQI : दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी सबसे अधिक

दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गुरुवार को सुबह नौ बजे 393 रहा। इसका 24 घंटे की अवधि का औसत AQI बुधवार शाम 4 बजे 401 दर्ज किया गया था।

Last Updated- November 16, 2023 | 12:15 PM IST
Delhi AQI

दिल्ली की वायु गुणवत्ता गुरुवार को बहुत खराब और गंभीर श्रेणी के बीच रही। ऐसा इसीलिए हुआ, क्योंकि प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कणों का बिखराव नहीं हो पाया। दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान-कानपुर की एक संयुक्त परियोजना के हालिया निष्कर्षों से पता चला कि बुधवार को राजधानी के वायु प्रदूषण में वाहनों के उत्सर्जन का योगदान लगभग 38 प्रतिशत था।

गुरुवार को यह आंकड़ा 40 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। माध्यमिक अकार्बनिक एयरोसोल- सल्फेट और नाइट्रेट जैसे कण जो बिजली संयंत्रों, रिफाइनरियों और वाहनों जैसे स्रोतों से गैसों और कण प्रदूषकों की परस्पर क्रिया के कारण वायुमंडल में बनते हैं- दिल्ली की हवा में प्रदूषण के दूसरे प्रमुख योगदानकर्ता हैं।

पिछले कुछ दिनों में शहर के प्रदूषण में माध्यमिक अकार्बनिक एयरोसोल का योगदान 30 से 35 प्रतिशत रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी ने बताया कि हवा नहीं चलने और कम तापमान के कारण प्रदूषक तत्व हवा में बने हुये हैं और अगले कुछ दिन तक भी राहत के आसार नहीं हैं।

दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गुरुवार को सुबह नौ बजे 393 रहा। इसका 24 घंटे की अवधि का औसत AQI बुधवार शाम 4 बजे 401 दर्ज किया गया था। मंगलवार को यह 397 था। सोमवार को यह 358 और रविवार को 218, शनिवार को 220, शुक्रवार को 279 था। पड़ोसी गाजियाबाद (358), गुरुग्राम (325), ग्रेटर नोएडा (343), नोएडा (337) और फरीदाबाद (409) में भी वायु गुणवत्ता बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।

शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’, 401 से 450 के बीच ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर ‘अत्यधिक गंभीर’ माना जाता है।

राज्य सरकार द्वारा निर्माण कार्य और शहर में डीजल से चलने वाले ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध सहित कड़े कदम उठाए जाने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से दिल्ली की वायु गुणवत्ता का स्तर गिर रहा है।

प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के योगदान की पहचान करने के लिए पुणे स्थित भारतीय ऊष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित एक प्रणाली के अनुसार, बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण में पराली जलाने की घटनाओं की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत थी। गुरुवार को इसके 11 फीसदी और शुक्रवार को चार प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के एक अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार की वायु प्रदूषण नियंत्रण योजना का अंतिम चरण, जिसे क्रमिक प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) कहते हैं, अगले आदेश तक जारी रहेगा। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में निर्माण कार्य और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध सहित कड़े कदम उठाए गए हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा था कि अगर एक्यूआई 400 का आंकड़ा पार करता है तो दिल्ली सरकार वाहनों के परिचालन को सीमित करने से संबंधित सम-विषम योजना लागू कर सकती है।

शुक्रवार को बारिश के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह सम-विषम योजना के कार्यान्वयन को स्थगित कर दिया था। योजना के तहत कारों को उनके पंजीकरण संख्या के विषम या सम अंतिम अंक के आधार पर वैकल्पिक दिनों में संचालित करने की अनुमति दी जाती है।

चिकित्सकों का कहना है कि दिल्ली की प्रदूषित हवा में सांस लेना एक दिन में लगभग 10 सिगरेट पीने के हानिकारक प्रभावों के बराबर है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उच्च स्तर के प्रदूषण के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं या बढ़ सकती हैं और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

वाहन उत्सर्जन, धान-पुआल जलाने, पटाखे और अन्य स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के साथ प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थितियां, सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में खतरनाक वायु गुणवत्ता स्तर में योगदान करती हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली में एक से 15 नवंबर तक प्रदूषण चरम पर होता है, जब पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है।

बुधवार को पंजाब में पराली जलाने की 2,544 घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे 15 सितंबर के बाद से इस तरह की घटनाओं की संख्या 30,661 हो गई है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता दुनिया के राजधानी शहरों में सबसे खराब है। अगस्त में शिकागो विश्वविद्यालय में ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) द्वारा संकलित एक रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण दिल्ली में लोगों की उम्र लगभग 12 साल कम कर रहा है।

First Published - November 16, 2023 | 12:15 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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